March 30, 2026

दिवालियापन कानून में होंगे 12 बड़े बदलाव, लोकसभा से संशोधन बिल पास

दिवालियापन कानून में होंगे 12 बड़े...

नई दिल्ली, 30 मार्च : लोकसभा ने सोमवार को Insolvency and Bankruptcy Code (संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी। इस बिल का उद्देश्य दिवालियापन प्रक्रिया से गुजर रही कंपनियों के समाधान को तेज करना है।

नए प्रावधान के तहत, किसी कंपनी के डिफॉल्ट साबित होने के बाद दिवालियापन याचिका स्वीकार करने के लिए 14 दिनों की अनिवार्य समय सीमा तय की गई है।

12 संशोधनों से मजबूत होगी प्रक्रिया

वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने बताया कि सरकार ने इस बिल में 12 संशोधन प्रस्तावित किए हैं, ताकि समाधान प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि IBC प्रक्रिया में देरी का मुख्य कारण लंबी मुकदमेबाजी है, जिसे कम करने के लिए बिल में दुरुपयोग रोकने हेतु दंड का भी प्रावधान किया गया है।

इस बिल पर 27 मार्च को लोकसभा में विस्तृत चर्चा हुई थी। इससे पहले इसे एक चयन समिति के पास भेजा गया था, ताकि इसमें आवश्यक सुधार किए जा सकें।

IBC का क्या है उद्देश्य?

वित्त मंत्री ने सदन में कहा कि IBC ने देश के बैंकिंग सेक्टर की स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून कभी भी कर्ज वसूली का साधन नहीं था, बल्कि संकटग्रस्त कंपनियों को पुनर्जीवित करने का एक ढांचा है।

Insolvency and Bankruptcy Code को 2016 में लागू किया गया था। तब से यह कानून कंपनियों के बेहतर क्रेडिट अनुशासन और कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने में सहायक रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस ढांचे के जरिए कंपनियां दिवालियापन प्रक्रिया से निकलने के बाद बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और उनकी वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है।