चंडीगढ़, 15 अक्तूबर : आय से अधिक संपत्ति मामले में अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को नियमित ज़मानत नहीं मिल सकी। सुनवाई के दौरान विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में जवाब देने के लिए समय माँगा। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से कहा, “आपको सुनवाई से पहले ही जवाब दाखिल करने को कहा गया था, तो आपने अभी तक जवाब क्यों नहीं दाखिल किया?” हाईकोर्ट ने कहा, “आप चालान पेश कर चुके हैं, अब आपके जवाब की कोई ज़रूरत नहीं है।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर को मेरिट के आधार पर शुरू की जाएगी।
मजीठिया सत्तारूढ़ पार्टी की नीतियों के कट्टर आलोचक हैं
6 जुलाई से नई नाभा जेल में बंद मजीठिया को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने 25 जून को अमृतसर से कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। मजीठिया ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए राहत के लिए हाईकोर्ट में अपील की थी। याचिका में मजीठिया ने दावा किया था कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर राजनीतिक बदले की भावना से की गई है। उन्होंने इसे सरकार द्वारा उन्हें बदनाम करने की साजिश बताया। मजीठिया के मुताबिक, वह सत्तारूढ़ पार्टी की नीतियों के कट्टर आलोचक रहे हैं और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया।
मजीठिया ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उन्हें सुबह 9 बजे उनके घर से हिरासत में लिया गया, जबकि उनकी औपचारिक गिरफ्तारी सुबह 11.20 बजे हुई। उन्होंने इस विसंगति को अवैध हिरासत करार दिया और कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 22(2) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (जिसे पहले सीआरपीसी की धारा 167 कहा जाता था) का उल्लंघन है, जिसके तहत किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए।
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