नई दिल्ली, 12 नवम्बर : सोमवार को हुए धमाके में किस तरह का विस्फोटक या रसायन इस्तेमाल हुआ, यह अभी साफ नहीं हो पाया है। प्राथमिक आकलन से घटनास्थल पर हुए नुकसान और हताहतों की संख्या देखते हुए मिलिट्री-ग्रेड विस्फोटकों के इस्तेमाल का शक बताया जा रहा है। फॉरेंसिक और एनएसजी की एक्सप्लोसिव यूनिट अपनी रिपोर्ट दाखिल कर रही है।
40 से अधिक नमूने एकत्र किए गए
अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) की एक टीम ने लाल किले के पास विस्फोट स्थल से 40 से ज़्यादा नमूने एकत्र किए हैं। इनमें एक ज़िंदा कारतूस समेत दो कारतूस और दो अलग-अलग तरह के विस्फोटकों के नमूने शामिल हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआती विश्लेषण से पता चला है कि विस्फोटकों में से एक नमूना अमोनियम नाइट्रेट प्रतीत होता है।
सोमवार को दिल्ली पुलिस ने फरीदाबाद स्थित एक घर पर छापेमारी के दौरान 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया था। पुलिस ने इस सिलसिले में अल फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े डॉ. मुज़म्मिल गनई और डॉ. शाहीन सईद को गिरफ्तार किया था।
अधिकारी ने कहा, “दूसरा विस्फोटक नमूना अमोनियम नाइट्रेट से भी ज़्यादा शक्तिशाली माना जा रहा है। इसकी सटीक संरचना की पुष्टि व्यापक फोरेंसिक जाँच के बाद होगी।” अधिकारियों के अनुसार, फोरेंसिक टीम को घटनास्थल का निरीक्षण करते समय कारतूस मिले। अब तक 40 से ज़्यादा नमूने एकत्र किए जा चुके हैं।
विस्फोटक उपकरण बदलते समय ‘गलती से’ विस्फोट हुआ
अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जाँच से पता चला है कि अंतरराज्यीय आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद, असेंबल किया गया विस्फोटक उपकरण जल्दबाजी में एक जगह से दूसरी जगह ले जाते समय ‘गलती से’ फट गया होगा। जाँचकर्ताओं को अब तक पता चला है कि पुलवामा का डॉक्टर उमर नबी विस्फोट में इस्तेमाल की गई कार चला रहा था और फरीदाबाद में विस्फोटकों की बरामदगी का कथित तौर पर भंडाफोड़ किए गए आतंकी मॉड्यूल से संबंध था।
सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मॉड्यूल से जुड़े संदिग्धों को पकड़ने के लिए दिल्ली-एनसीआर और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में कई जगहों पर छापेमारी के बाद घबराहट और हताशा में यह विस्फोट किया गया।
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