अमृतसर, 14 नवम्बर : तरन तारन उप चुनाव में अच्छे प्रदर्शन से इस बात को बल मिल रहा है कि सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाली शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने वापसी कर ली है और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ‘पंथिक’ नब्ज पर अपनी पकड़ बनाए हुए है।
हालांकि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) उपचुनाव में तरनतारन सीट को चुनावी रुझानों में मजबूत बढ़त दिलाकर उसे बरकरार रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल की उम्मीदवार सुखविंदर कौर रंधावा द्वारा दी गई कड़ी टक्कर ने साबित कर दिया है कि बागी अकाली, जिन्हें ‘अलगाववादी’ या ‘पुनरुत्थानवादी’ कहा जा रहा है, शिअद की ‘सांप्रदायिक पकड़’ को ढीला करने में बुरी तरह विफल रहे हैं।
शिअद ने सुखविंदर कौर रंधावा को मैदान में उतारा
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने यहाँ से सुखविंदर कौर रंधावा को मैदान में उतारा है, जो एक सेवानिवृत्त प्रिंसिपल हैं और जिनके परिवार में ‘धर्मी फौजी’ की विरासत है। गौरतलब है कि ‘धर्मी फौजी’ वे लोग होते हैं जिन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान अपनी सैन्य सेवाएँ छोड़कर सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
दूसरी ओर, अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाली पार्टी ‘वारिस पंजाब दे’ (डब्ल्यूपीडी) और शिरोमणि अकाली दल (पुनरसुरजीत) के संयुक्त उम्मीदवार मनदीप सिंह थे। मनदीप सिंह, शिवसेना (टकसाली) नेता सुधीर सूरी की हत्या के आरोपी संदीप सिंह सनी के भाई हैं। सनी फिलहाल संगरूर जेल में बंद हैं और हाल ही में पटियाला जेल में फर्जी मुठभेड़ मामलों में दोषी ठहराए गए पूर्व पुलिस अधिकारियों पर हमला करने के कारण सुर्खियों में आए थे।
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