चंडीगढ़, 19 नवम्बर : शिरोमणि अकाली दल (पुनरुत्थान) के अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सुखबीर सिंह बादल पर दोहरे व्यवहार की राजनीति करने का आरोप लगाया है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने सोशल मीडिया पेज पर सुखबीर बादल पर टिप्पणी करते हुए एक शेयर में कहा है कि ‘ये जबर भी देखा है तारीख की नजरों ने, लम्हों ने खता की थी सदायों ने साना बदला।’
बादल परिवार अवसरवादि
उन्होंने लिखा है कि पंजाब आज भी उन डकैतों की कीमत चुका रहा है जिन्होंने केंद्र सरकार के साथ मिलकर पंजाब के संसाधनों और विरासत को अपने ही राज्य में कत्ल कर दिया। चाहे वह 1977-80 के कार्यकाल में एसवाईएल के लिए शुरुआती समर्थन हो (जिसे बाद में अन्य पार्टी नेताओं के दबाव के बाद वापस ले लिया गया) या पंजाब विश्वविद्यालय को केंद्र को सौंपने की लिखित मंज़ूरी, यह सब बादल परिवार की केंद्रीकरण की ताकत को मज़बूत करने की अवसरवादिता का नतीजा था।
केंद्रीकरण के हर कदम पर केंद्र के पक्ष में खड़ी है
आज जनता द्वारा पूरी तरह से नकार दिए जाने के बाद वे भले ही केंद्र के खिलाफ नाटक कर रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से लेकर जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद 370 को हटाने तक, यह पार्टी आज भी केंद्रीकरण के हर कदम पर खुलकर केंद्र के पक्ष में खड़ी है।
उनके दोगलेपन ने पंजाब के संवैधानिक संघर्ष को भले ही कमज़ोर कर दिया हो, लेकिन पंजाबी आज भी अपने राज्य, उसके पानी, पंजाब विश्वविद्यालय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी हिम्मत और दृढ़ता से डटे हुए हैं। सुखबीर बादल विश्वविद्यालय जाकर उनकी खूब पिटाई करते थे और जब वे सत्ता में थे, तब भी ऐसी चिट्ठियाँ लिखी जाती थीं।
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