चंडीगढ़, 26 नवम्बर : पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक आदेश में नाबालिग लड़की के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे युवक को सुरक्षा देने से साफ़ इनकार कर दिया है। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने कहा कि नाबालिग के साथ किसी भी तरह का लिव-इन रिलेशनशिप न केवल अनैतिक है, बल्कि पूरी तरह से अवैध भी है। ऐसे रिश्ते को संवैधानिक संरक्षण नहीं दिया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे रिश्तों को सुरक्षा प्रदान करने से मौजूदा बाल संरक्षण कानूनों का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
17 वर्षीय लडक़ी 27 वर्षीय लडक़े ने की सुरक्षा की मांग
यह मामला यमुनानगर की एक 17 वर्षीय लड़की और 27 वर्षीय व्यक्ति द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। दोनों ने दावा किया कि वे लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं और उनके परिवार उनकी जान को खतरा पैदा कर सकते हैं। पुलिस में दर्ज शिकायत का हवाला देते हुए उन्होंने सुरक्षा की माँग की। हालाँकि, रिकॉर्ड देखने के बाद, अदालत ने फैसला सुनाया कि लड़की के नाबालिग होने के कारण यह रिश्ता अवैध था।
सुनवाई के दौरान, हरियाणा सरकार के वकील ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों के साथ लिव-इन रिलेशनशिप न तो सामाजिक रूप से स्वीकार्य है और न ही कानूनी रूप से। ऐसे रिश्तों को संरक्षण देने से बाल यौन शोषण, बाल विवाह और नाबालिगों की सुरक्षा रोकने के उद्देश्य विफल हो जाएँगे। अदालत इस तर्क से सहमत हुई और उसने सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया है कि वैध लिव-इन रिलेशनशिप के लिए दोनों पक्षों का वयस्क होना ज़रूरी है।
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