चंडीगढ़, 27 नवम्बर : केंद्र सरकार अब सतलुज यमुना लिंक नहर मुद्दे पर पंजाब और हरियाणा के बीच मध्यस्थता से पीछे हट रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराने के लिए केंद्र अपने नेतृत्व में पंजाब और हरियाणा के बीच पाँच दौर की द्विपक्षीय वार्ता कर चुका है, जिसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। पंजाब विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार राजनीतिक दृष्टिकोण से फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
अमित शाह ने सभी मुद्दों को टाल दिया था
केंद्र सरकार ने हाल ही में चंडीगढ़ को राष्ट्रपति के सीधे नियंत्रण में लाने का कदम उठाया था, जिसका पंजाब में कड़ा विरोध हुआ था। नतीजतन, केंद्र को पीछे हटना पड़ा। पानी के मुद्दे पर भी केंद्र अब किसी भी राजनीतिक पेचीदगी से बचता दिख रहा है। 17 नवंबर को फरीदाबाद में हुई उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नदी जल से जुड़े सभी मुद्दों को टाल दिया था।
अब केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सीआर पाटिल ने पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कहा है कि दोनों राज्य सतलुज-यमुना लिंक नहर के मुद्दे पर बैठक करें और आपसी सहयोग से इस मसले को निपटाएं। पाटिल ने लिखा है कि केंद्र सरकार भी दोनों राज्यों को आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने केंद्र के नेतृत्व में 5 अगस्त को इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की हुई बैठक का हवाला देते हुए कहा है कि दोनों राज्य सकारात्मक भावना के साथ आगे बढ़ने पर सहमत हुए थे, जिसके चलते अब दोनों राज्यों को अपने प्रस्तावों पर चर्चा के लिए द्विपक्षीय वार्ता करनी चाहिए।
दूसरी ओर, जानकारों के अनुसार, अब जबकि केंद्र ने दोनों राज्यों के बीच मध्यस्थता से हाथ खींच लिए हैं, तो पंजाब किसी भी हालत में अपनी ओर से बातचीत की पहल नहीं करेगा। निकट भविष्य में इस मामले में कोई सफलता मिलने की संभावना नहीं है।
यह भी देखें : डी.आई.जी. भुल्लर मामले में हाईकोर्ट द्वारा आदेशों के रिकार्ड मांगे

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