January 2, 2026

एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल से बढ़ा गंभीर स्वास्थ्य संकट

एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल से ...

नई दिल्ली, 2 जनवरी : गोरखपुर में आरएमआरसी (Regional Institute of Medical Sciences) के अध्ययन में पाया गया है कि एंटीबायोटिक दवाओं के लगातार अधिक इस्तेमाल के कारण बैक्टीरिया अपने जीन में बदलाव कर रहे हैं। इससे सामान्य एंटीबायोटिक दवाइयां धीरे-धीरे असर नहीं दिखा रही हैं। अध्ययन में निमोनिया के मुख्य कारण स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिएई (न्यूमोकॉकस) बैक्टीरिया का जीनोम सीक्वेंसिंग किया गया और पता चला कि उस जीन में परिवर्तन आ चुका है जिस पर दवाइयां असर करती हैं।

डॉक्टर और आम लोगों की भूमिका

आरएमआरसी के वायरोलॉजिस्ट डॉ. अशोक पांडे का कहना है कि कई बार CHC (Community Health Centers) और PHC (Primary Health Centers) पर डॉक्टर बिना ठोस कारण एंटीबायोटिक लिख देते हैं। इसके अलावा आम लोग साधारण बीमारियों में भी फार्मासिस्ट से पूछकर खुद ही दवा लेने लगते हैं। ऐसे गैर-जरूरी इस्तेमाल से बैक्टीरिया में ड्रग रेजिस्टेंस (दवा प्रतिरोधी क्षमता) बढ़ रही है।

अत्यधिक इस्तेमाल से गंभीर मरीजों पर असर

जैसे ही कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ता है और एंटीबायोटिक की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब ये दवाइयां असर नहीं दिखाती। आरएमआरसी के गोरखपुर ब्रांच में एक साल से चल रहे अध्ययन में करीब 600 रोगियों की CHC और PHC की परचियों की जांच की गई। इसमें लगभग सभी रोगियों को एंटीबायोटिक लिखी गई थी। 72% पर एज़िथ्रोमाइसिन और बाकी पर अमोक्सिसिलिन लिखी मिली।

वायरल बिमारियों में भी दवाओं का गलत इस्तेमाल

हैरानी की बात यह है कि वाइरल फीवर जैसी बीमारियों में भी डॉक्टर एंटीबायोटिक लिख रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार वायरल इन्फेक्शन में एंटीबायोटिक का कोई उपयोग नहीं होता। कई बच्चों को उनकी उम्र और वजन के अनुसार कम खुराक लिखी जानी चाहिए थी, लेकिन 500mg की एज़िथ्रोमाइसिन दी गई। यह भी बैक्टीरिया में रेजिस्टेंस बढ़ाने का बड़ा कारण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने दी चेतावनी

आईसीएमआर के अन्य अध्ययन में पाया गया कि 75 से 91% बैक्टीरिया ने एंटीबायोटिक के खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर लिया है। यह स्थिति आने वाले समय में साधारण संक्रमणों को भी जानलेवा बना सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 दिसंबर को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल पर चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एंटीबायोटिक कोई तुरंत समाधान नहीं हैं और इनका इस्तेमाल सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही होना चाहिए।

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