महासमुंद (छत्तीसगढ़), 12 जनवरी : महासमुंद जिले के बागबाहरा स्टोरेज सेंटर में 18,433 क्विंटल धान की कमी पाई गई है, जिसका अनुमानित मूल्य लगभग 5 करोड़ रुपये है। यह कमी 2024-2025 में स्टोर किए गए धान के स्टॉक का मिलान करने पर सामने आई। इस पर जब जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया गया, तो उन्होंने चूहों, कीटों और धान के सूखने को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
पहले भी सामने आई थी धान की कमी
इससे पहले, कबीरधाम जिले के विभिन्न स्टोरेज सेंटरों में 26,000 क्विंटल धान की कमी पाई गई थी, जिसका मूल्य लगभग 8 करोड़ रुपये था। यहां भी चूहों और कीटों को ही दोषी ठहराया गया था। बागबाहरा स्टोरेज सेंटर के इंचार्ज दीपेश पांडे का कहना है कि लगभग 10 महीने पहले धान स्टोरेज सेंटर में था, जिसके कारण वह काफी सूख गया। साथ ही, बारिश, सीलन और चूहों से भी भारी नुकसान हुआ, जिससे धान का स्टॉक कम हो गया।
जांच जारी, कार्रवाई का आश्वासन
महासमुंद जिले के अलॉट अधिकारी आशीष कोसरिया ने बताया कि मामले में नोटिस जारी किया गया है और जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा धान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्टोरेज सेंटरों में मार्कफेड के कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। इसके बावजूद, छत्तीसगढ़ में धान की कमी के तीन मामलों के सामने आने से सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल उठ रहे हैं।
आर्थिक नुकसान और चिंताएं
इन घटनाओं के कारण, ट्रैफिक किराया, हमाली, स्टोरेज और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, ताकि धान में कोई कमी न हो। लेकिन इसके बावजूद, प्रदेश में करोड़ों रुपये के नुकसान की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
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