January 12, 2026

असफल हो रहे ISRO के मिशन PSLV-C62 में कहां आई तकनीकी खराबी

असफल हो रहे ISRO के मिशन...

नई दिल्ली, 12 जनवरी : साल 2026 भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अच्छी शुरुआत नहीं लेकर आया। सोमवार, 12 जनवरी को साल के पहले ही अंतरिक्ष मिशन को बड़ी असफलता का सामना करना पड़ा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा लॉन्च किया गया PSLV-C62 रॉकेट तकनीकी खराबी के कारण असफल हो गया

इससे पहले मई 2025 में लॉन्च हुआ PSLV-C61 मिशन भी इसी तरह विफल हो चुका था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर भारत के अंतरिक्ष मिशन लगातार क्यों असफल हो रहे हैं? आइए पूरी तकनीकी वजह समझते हैं।

ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने क्या कहा?

ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने उड़ान के बाद जारी बयान में कहा: “मिशन के दौरान एक तकनीकी खराबी सामने आई। शुरुआती उड़ान चरण सामान्य रहे, लेकिन तीसरे चरण (PS3) में चैंबर प्रेशर अचानक गिर गया, जिससे आवश्यक थ्रस्ट पैदा नहीं हो सका।”

“हमने निर्धारित उड़ान पथ से बड़ा विचलन देखा, जिसके कारण उपग्रहों को उनकी कक्षा (ऑर्बिट) में स्थापित नहीं किया जा सका।” ISRO ने बताया कि Failure Analysis Committee पूरे टेलीमेट्री डेटा की जांच करेगी और समान लोड स्थितियों में फ्लेक्स नोज़ल की भी परीक्षण प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि मूल कारण का पता लगाया जा सके।

अचानक नियंत्रण खो बैठा रॉकेट

टेलीमेट्री स्क्रीन पर विचलन के संकेत मिलने लगे। रॉकेट अचानक अपने अक्ष पर घूमने लगा, जैसे कोई लट्टू घूमता है। ऐसा प्रतीत हुआ कि रॉकेट ने अपना संतुलन खो दिया हो।करीब 8,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंतरिक्ष के खतरनाक निर्वात में उड़ान भरते हुए, थोड़ी सी भी तकनीकी गड़बड़ी मिशन को पूरी तरह विफल कर सकती है। उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाने के बजाय, यान अपने निर्धारित मार्ग से भटक गया।

लगातार दूसरी बार तीसरे चरण में नाकामी

PSLV-C62 से पहले, PSLV-C61 मिशन भी मई 2025 में तीसरे चरण के दौरान विफल हो गया था। उस समय भी चैंबर प्रेशर में लगातार गिरावट देखी गई थी, जिससे थ्रस्ट कम हुआ और उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच सके।