चंडीगढ़, 13 जनवरी : पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस के कामकाज पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि देश में ब्रिटिश युग की शैली की पुलिसिंग अब किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि बिना पूरी जांच और सत्यापन के केवल अप्रमाणित जानकारी के आधार पर मामले दर्ज करना नागरिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
डीजीपी को गंभीर मामलों की जांच के निर्देश
हाई कोर्ट ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिए हैं कि वे यह जांच करें कि राज्य में कितने गंभीर आपराधिक मामले केवल अप्रमाणित जानकारी के आधार पर दर्ज किए जा रहे हैं। अदालत ने विशेष रूप से 18 से 20 वर्ष की आयु के युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों पर चिंता जताई। जस्टिस संजय वशिष्ठ ने अपने आदेश में कहा कि अदालत को ब्रिटिश युग की याद आती है, जब पुलिस बिना किसी ठोस जांच के केवल सूचना के आधार पर लोगों पर आरोप लगा दिया करती थी। उन्होंने कहा कि आज के लोकतांत्रिक दौर में ऐसी प्रथाएं कानून के शासन और व्यक्तिगत अधिकारों के खिलाफ हैं।
नागरिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला: अदालत
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना पुख्ता सबूतों के मामले दर्ज करना युवाओं के भविष्य को खतरे में डालता है और इसे नागरिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना जा सकता है। अदालत 19 वर्षीय युवक द्वारा दायर नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस युवक के खिलाफ 29 जून 2025 को अमृतसर शहर के गेट हकीमा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी।
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