नई दिल्ली, 14 जनवरी : दिल्ली सरकार के छह मंत्रियों ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। इस संबंध में मंत्रियों ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपा है। मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है और सरकार व विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि वह इस मामले को पूरी मजबूती से आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं का अपमान करना माफी के काबिल नहीं है और ऐसे मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
6 जनवरी की विधानसभा कार्यवाही का मामला
कपिल मिश्रा ने बताया कि यह विवाद 6 जनवरी की विधानसभा कार्यवाही से जुड़ा है। उस दिन सदन में गुरु तेग बहादुर जी, भाई सती दास जी, भाई मती दास जी और भाई दयाला जी की शहादत पर चर्चा हो रही थी। आरोप है कि चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। सरकारी पक्ष का कहना है कि आतिशी के बयान से न केवल धार्मिक भावनाएं आहत हुईं, बल्कि विधानसभा की गरिमा को भी ठेस पहुंची। इसी आधार पर उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की जा रही है।
सदन से दूरी बनाए हुए हैं आतिशी
घटना के बाद से आतिशी विधानसभा की कार्यवाही और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें कई बार सदन में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है, लेकिन अब तक वह सामने नहीं आई हैं। इस मामले पर अब सबकी नजर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी है। अगर सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम साबित हो सकता है।
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