नई दिल्ली/चंडीगढ़, 14 जनवरी : भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्य के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को फरवरी महीने में ब्रिटेन (UK) और इज़राइल जाने के लिए राजनीतिक मंजूरी देने से इंकार कर दिया है। मुख्यमंत्री मान, जिनके पास डिप्लोमेटिक पासपोर्ट है, एक प्रतिनिधिमंडल के साथ इन देशों में निवेशकों को पंजाब में निवेश करने के लिए आमंत्रित करने के उद्देश्य से यात्रा करने वाले थे।
सूत्रों के अनुसार, यह यात्रा 7 से 10 दिनों तक चलने वाली थी, और इसका उद्देश्य मार्च में पंजाब में आयोजित होने वाले निवेशक सम्मेलन (Investor’s Summit) के लिए विदेशी निवेशकों को उत्साहित करना था। इस 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव रवि भगत और उद्योग विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।
मंजूरी न देने का कोई स्पष्ट कारण नहीं
विदेश मंत्रालय ने इस मंजूरी को रद्द करने का कोई विशेष कारण नहीं बताया। मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इंकार करते हुए केवल इतना कहा कि किसी को विदेश जाने की अनुमति देने या न देने के पीछे कई गणनाएँ होती हैं। प्रोटोकॉल के अनुसार, मंत्रालय संबंधित देश के दूतावास से जवाब प्राप्त करने के बाद ही अनुमति के बारे में निर्णय लेता है।
सूत्रों के मुताबिक, ऐसे दौरे की रूपरेखा, होटल बुकिंग और अन्य व्यवस्थाएं राजनीतिक मंजूरी मिलने के बाद ही की जाती हैं। चूंकि इस बार मंजूरी नहीं दी गई है, मुख्यमंत्री के पास अब इस दौरे को रद्द करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है।
पिछली बार भी मिली थी अनुमति नहीं
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री भगवंत मान को विदेश यात्रा की अनुमति नहीं मिली है। अगस्त 2024 में भी उन्हें पेरिस ओलंपिक में जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके अलावा, अगस्त 2025 में कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ई.टी.ओ. को भी अमेरिका जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। विदेश मंत्रालय के फैसले ने एक बार फिर राजनीतिक मंजूरी के मुद्दे को तूल दिया है, और इसे कई राजनीतिक विश्लेषक सरकार की विदेश नीति और केंद्रीय अधिकार क्षेत्र से जोड़ कर देख रहे हैं।
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