नई दिल्ली, 15 जनवरी : माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी दिन माघ मेले का तीसरा प्रमुख स्नान भी होता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से साधक को विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जाने-अनजाने किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं।
गंगा स्नान से मिलता है पुण्य लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन प्रातःकाल गंगा स्नान करना अत्यंत फलदायी होता है। यदि किसी कारणवश गंगा तट पर जाकर स्नान करना संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इससे भी समान पुण्य फल प्राप्त होते हैं।
पितरों के लिए तर्पण और दान का विशेष दिन
इस दिन पितरों की कृपा पाने के लिए तर्पण, दान और पुण्य कर्म करना बेहद शुभ माना जाता है। स्नान के बाद पितरों के निमित्त दान-पुण्य करें। सफेद वस्त्र या गर्म कपड़ों का दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है।
मौनी अमावस्या पर जरूर करें ये उपाय
स्नान के बाद एक पात्र में जल लें और उसमें कुश, अक्षत (चावल) और काले तिल मिलाएं। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित करें और ‘ॐ पितृभ्यो नमः’ मंत्र का कम से कम 11 बार जाप करें। इसके साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराएं। यदि संभव हो तो हरिद्वार या गया जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों पर जाकर दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
पीपल के वृक्ष से मिलेगी पितरों की कृपा
हिंदू धर्म में मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में पितरों का वास होता है। ऐसे में माघ अमावस्या की संध्या को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। साथ ही दूध और गंगाजल अर्पित करें और सात बार पीपल की परिक्रमा करें।
पितृ दोष होगा शांत, घर में आएगी सकारात्मक ऊर्जा
इन उपायों को करने से पितृ दोष शांत होता है और पितरों की कृपा से घर-परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। मौनी अमावस्या को पितरों को स्मरण कर किए गए ये धार्मिक कर्म जीवन में शुभ फल प्रदान करते हैं।
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