चंडीगढ़, 16 जनवरी : चंडीगढ़ और पंजाब में वरिष्ठ अफसरों के लिए सियासत किसी फायदे वाले पेशे से कम नहीं मानी जा रही। पहले सरकारी सेवा के दौरान पेंशन सुनिश्चित होती है, फिर राजनीति में किस्मत आजमाने के बाद विधायक, सांसद या मंत्री बनने पर नई सुविधाएं और हार के बाद अतिरिक्त पेंशन मिलती है। यही वजह है कि कई पूर्व अफसर आज दो-दो甚至 तीन-तीन पेंशन ले रहे हैं।
सोम प्रकाश को मिल रहीं तीन पेंशन
भाजपा नेता और पूर्व आईएएस अधिकारी सोम प्रकाश इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं।
- आईएएस से सेवानिवृत्ति के बाद पहली पेंशन
- विधायक बनने और फिर हारने के बाद दूसरी पेंशन
- केंद्रीय मंत्री रहने के बाद तीसरी पेंशन
नौकरी और सियासत—दोनों के लाभ जोड़कर वे वर्तमान में तीन पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।
पूर्व आईएएस और पीसीएस अधिकारियों की लंबी सूची
कांग्रेस नेता और पूर्व आईएएस अधिकारी कुलदीप सिंह वैद (गिल हलका) को पूर्व विधायक के रूप में लगभग 85 हजार और सेवानिवृत्त अफसर के रूप में इतनी ही पेंशन मिल रही है। जगराओं से पूर्व विधायक एस.आर. कलेर (पूर्व पीसीएस अधिकारी) भी दो पेंशन ले रहे हैं। पंजाब विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर अजयब सिंह भट्टी (पूर्व पीसीएस) को भी दोहरी पेंशन मिल रही है।
पूर्व जस्टिस निर्मल सिंह और पूर्व सांसद परमजीत कौर गुलशन को शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्ति और राजनीतिक पदों के कारण दो-दो पेंशन मिल रही हैं।
पूर्व शिक्षा मंत्री उपिंदरजीत कौर को पूर्व विधायक के रूप में 85 हजार से अधिक और पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से प्रोफेसर के रूप में लगभग 1.10 लाख रुपये मासिक पेंशन मिल रही है।
‘आप’ और अन्य दलों के नेता भी दोहरी पेंशन में
मानसा से ‘आप’ के पूर्व विधायक नाजर सिंह मानशाहिया, पूर्व विधायक गुरा सिंह तुंगवाली और जैतो से विधायक रहे मास्टर बलदेव सिंह—ये सभी सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आए और अब दो-दो पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। इन नेताओं और अफसरों का कहना है कि उन्होंने जीवन का बड़ा हिस्सा सरकारी सेवा में लगाया और बाद में राजनीति में जनता की सेवा की। दोनों पेंशन पूरी तरह नियमों के अनुसार मिल रही हैं और इसमें कुछ भी गैर-कानूनी नहीं है।
मौजूदा विधायकों में भी कई पूर्व अफसर
वर्तमान पंजाब विधानसभा में भी कई विधायक ऐसे हैं जो सरकारी सेवा छोड़कर राजनीति में आए, जिनमें डॉ. बलजीत कौर, हरभजन सिंह ईटीओ, प्रिंसिपल बुद्ध राम, प्रिंसिपल सरबजीत कौर मानुके, कुंवर विजय प्रताप (पूर्व आईपीएस), बलविंदर सिंह धालीवाल (पूर्व आईएएस) शामिल हैं। मौजूदा सांसद डॉ. अमर सिंह भी पहले आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। हालांकि कानून इसकी इजाजत देता है, लेकिन आम जनता में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या एक व्यक्ति को कई-कई पेंशन मिलना नैतिक रूप से सही है, खासकर तब जब सरकारी खजाने पर पहले से ही भारी बोझ है।
यह भी देखें : पूर्व विधायकों की पेंशन में लगातार बढ़ोतरी, बजुर्गों की पेंशन वृद्धि वादे को भूली ‘आप’

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