January 16, 2026

‘ठाकरे ब्रांड’ का आखिरी किला भी ढहा, मुंबई में बनेगा भाजपा का किला

‘ठाकरे ब्रांड’ का आखिरी किला...

मुंबई, 16 जनवरी : मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के ऐतिहासिक चुनाव नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। करीब तीन दशकों से मुंबई की सत्ता पर काबिज रहे ठाकरे परिवार का दबदबा अब खत्म हो गया है। शुक्रवार को घोषित नतीजों में भाजपा–शिंदे गठबंधन (महायुति) ने ठाकरे परिवार के ‘आखिरी गढ़’ को ध्वस्त करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। इसके साथ ही यह तय हो गया है कि देश की सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी में इस बार भाजपा का मेयर बनेगा।

227 सीटों में महायुति को 127 सीटें, भाजपा सबसे बड़ी पार्टी

227 सदस्यीय बीएमसी में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत थी। ताजा आंकड़ों के अनुसार भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर 127 सीटें जीत लीं। इनमें भाजपा ने 97 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 30 सीटें मिलीं।

दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) का गठबंधन कुल 73 सीटों पर ही सिमट गया। इनमें शिवसेना (यूबीटी) को 64 और एमएनएस को 9 सीटें मिलीं। 20 साल बाद एकजुट होने के बावजूद ठाकरे भाई बीएमसी की सत्ता हासिल करने में नाकाम रहे।

कांग्रेस और अन्य दलों का कमजोर प्रदर्शन

इन चुनावों में कांग्रेस ने महाविकास अघाड़ी से अलग होकर चुनाव लड़ा, लेकिन वह दोनों बड़े गठबंधनों के बीच फंसकर रह गई। वंचित बहुजन अघाड़ी के साथ गठबंधन के बावजूद कांग्रेस 15 से ज्यादा सीटें जीतने में असफल रही। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने 6 सीटें जीतीं, हालांकि मुस्लिम वोटों का झुकाव शिवसेना (यूबीटी) की ओर दिखा।

तीन दशक पुराना दबदबा खत्म, ‘मराठी मानुस’ वोट बंटा

दादर, परेल और लालबाग जैसे इलाके दशकों से ठाकरे परिवार और शिवसेना का गढ़ माने जाते थे, लेकिन इस बार हालात बदलते दिखे। उद्धव और राज ठाकरे की एकजुटता के बावजूद ‘मराठी मानुस’ का वोट बंटा रहा। भाजपा के सहयोग से शिंदे गुट ने वर्ली और गिरगांव जैसे इलाकों में भी मजबूत पकड़ बना ली, जिससे ‘ठाकरे ब्रांड’ की राजनीतिक ताकत कमजोर पड़ गई।