नई दिल्ली, 18 जनवरी : अमेरिका के कैलिफोर्निया में अमेरिकी संघीय अदालतों ने इमीग्रेशन अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए हिरासत में लिए गए तीन भारतीय नागरिकों को रिहा करने का आदेश दिया है। अदालतों ने कहा कि इन भारतीयों को अमेरिका में रहने की अनुमति मिलने के बावजूद बिना किसी पूर्व सूचना और सुनवाई के दोबारा हिरासत में लिया गया, जो कानूनन गलत है।
अदालतों ने ICE की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
इस सप्ताह कैलिफोर्निया के पूर्वी और दक्षिणी जिलों में अलग-अलग मामलों में फैसले सुनाए गए। अदालतों ने पाया कि इमीग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने दोबारा गिरफ्तारी से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। तीनों भारतीय नागरिक उस समय शरण (Asylum) या अन्य इमीग्रेशन राहत की मांग कर रहे थे।
यूएस डिस्ट्रिक्ट जज ट्रॉय एल. ननली ने 21 वर्षीय हरमीत एस. की रिहाई का आदेश दिया। हरमीत अगस्त 2022 में अमेरिका पहुंचे थे। अदालत ने माना कि उन्होंने सभी शर्तों का पालन किया और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसी तरह एक अन्य फैसले में जज ननली ने भारतीय नागरिक सावन के. की रिहाई का आदेश दिया। सावन सितंबर 2024 में अमेरिका में दाखिल हुए थे और वे भी इमीग्रेशन राहत की प्रक्रिया में थे।
दक्षिणी कैलिफोर्निया में अमेरिकी जिला जज जैनिस एल. सममार्टिनो ने भारतीय नागरिक अमित की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की हिरासत से पहले इमीग्रेशन अधिकारियों को नोटिस देने और सुनवाई का पूरा अवसर देना होगा।
कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी पर चेतावनी
अदालतों के इन फैसलों को इमीग्रेशन मामलों में कानूनी अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। जजों ने साफ किया कि बिना उचित प्रक्रिया के किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेना अमेरिकी कानून और संविधान के खिलाफ है।

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