नई दिल्ली, 19 जनवरी : भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के समक्ष रूस-यूक्रेन युद्ध के नाम पर भारत को “चयनात्मक और अनुचित तरीके” से निशाना बनाए जाने पर आपत्ति जताई।
विदेश मंत्री जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि पोलैंड को आतंकवाद के प्रति “ज़ीरो टॉलरेंस” (शून्य सहनशीलता) की नीति अपनानी चाहिए और सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह का समर्थन नहीं देना चाहिए।
भारत की चिंताओं का मुद्दा
नई दिल्ली में पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ हुई मुलाकात के दौरान जयशंकर ने भारत की प्रमुख चिंताओं को उठाया। इस बैठक में दोनों देशों ने भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी के विस्तार की समीक्षा की और प्रमुख क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
पोलिश प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए जयशंकर ने कहा कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक मामलों में “काफी उथल-पुथल” है, ऐसे में विभिन्न क्षेत्रों के देशों के बीच संवाद और विचार-विमर्श और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
रणनीतिक साझेदारी
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत और पोलैंड के संबंध अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वारसा यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचे थे। दोनों देश 2024-28 की कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे और व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल नवाचार के क्षेत्रों में गहरे सहयोग की संभावनाओं को तलाशेंगे।
हालांकि बातचीत जल्द ही भू-राजनीति, विशेषकर यूक्रेन संघर्ष और उसके व्यापक प्रभावों की ओर मुड़ गई। जयशंकर ने कहा कि उन्होंने न्यूयॉर्क और पेरिस सहित कई अवसरों पर मंत्री सिकोरस्की के साथ भारत के विचार स्पष्ट रूप से साझा किए हैं और नई दिल्ली में भी उन्हें दोहराया।
जयशंकर ने आगे कहा, “मैंने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि भारत को चयनात्मक रूप से निशाना बनाना अनुचित और अन्यायपूर्ण है। मैं आज फिर यही बात दोहराता हूं। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह संघर्ष को समाप्त करने के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है और किसी विशेष गुट के पक्ष में जाकर चयनात्मक लक्ष्यों को निशाना बनाने से स्वयं को दूर रखता है।”
पोलैंड ने क्या कहा?
पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने भी मोटे तौर पर भारत की चिंताओं का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पोलैंड भी चयनात्मक लक्ष्यों को निशाना बनाए जाने की अनुचितता से सहमत है और चेतावनी दी कि ऐसी प्रथाओं से वैश्विक व्यापार में व्यापक उथल-पुथल हो सकती है।
अपने देश में हाल ही में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पोलैंड आगजनी और राज्य-प्रायोजित आतंकवाद की कोशिशों का शिकार रहा है, जिनमें रेलवे लाइन पर हमला भी शामिल है। पोलिश मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर मुकाबला करने की आवश्यकता पर भी सहमति जताई।

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