नई दिल्ली, 22 जनवरी : अमेरिकी सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और अडानी समूह के कार्यकारी सागर अडानी के खिलाफ एक बड़ा कानूनी कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन की इस एजेंसी ने एक अमेरिकी अदालत से अनुमति मांगी है कि वह 265 मिलियन डॉलर (करीब 24,000 करोड़ रुपये) की कथित धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी योजना के मामले में सीधे ईमेल के माध्यम से समन भेज सके।
भारत सरकार को बायपास करने की तैयारी
SEC का कहना है कि वह भारत सरकार को शामिल किए बिना सीधे गौतम अडानी और सागर अडानी को समन भेजना चाहता है। एजेंसी के अनुसार, भारत ने पहले दो बार समन भेजने के अनुरोधों को खारिज कर दिया था। ऐसे में SEC को मौजूदा प्रक्रिया के जरिए समन की तामील पूरी होने की उम्मीद नहीं है। यह मामला अमेरिका में किसी भारतीय कारोबारी समूह से जुड़ा सबसे हाई-प्रोफाइल कानूनी मामला माना जा रहा है। SEC पिछले एक साल से अडानी समूह के संस्थापक गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को समन भेजने का प्रयास कर रहा है।
अडानी समूह का जवाब
अडानी समूह ने इन सभी आरोपों को “निराधार” बताया है। समूह का कहना है कि वह अपने बचाव के लिए “सभी संभव कानूनी विकल्पों” का इस्तेमाल करेगा। हालांकि, 21 जनवरी को SEC की ताजा फाइलिंग पर टिप्पणी के लिए रॉयटर्स की ओर से भेजे गए अनुरोध का समूह ने तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। न्यूयॉर्क की अदालत में दायर अपने जवाब में SEC ने कहा कि मौजूदा कानूनी प्रक्रिया के तहत समन की सेवा संभव नहीं दिख रही है। इसलिए एजेंसी को ईमेल के जरिए सीधे अडानी समूह के अधिकारियों को समन भेजने की अनुमति दी जानी चाहिए।
पूरा मामला क्या है?
नवंबर 2024 में जारी आरोप पत्र के अनुसार, अडानी समूह के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अडानी समूह की इकाई अडानी ग्रीन एनर्जी द्वारा उत्पादित बिजली की खरीद सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना बनाई। SEC की शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी के भ्रष्टाचार-रोधी उपायों से जुड़ी अहम जानकारी छिपाकर अमेरिकी निवेशकों को गुमराह किया गया।
समन को लेकर भारत का रुख
SEC की फाइलिंग के अनुसार, भारत द्वारा समन की सेवा से इनकार प्रक्रिया संबंधी कारणों पर आधारित था, जैसे दस्तखत और मुहर की आवश्यकताएं। SEC का तर्क है कि हेग कन्वेंशन जैसी अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत ये शर्तें अनिवार्य नहीं हैं। दिसंबर 2025 में हुए दूसरे इनकार में यह भी कहा गया कि भारत के कानून मंत्रालय ने SEC के समन भेजने के अधिकार पर सवाल उठाए थे।
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