नई दिल्ली/बरेली, 27 जनवरी : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए नए ‘इक्विटी नियमों’ को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और दिल्ली सहित कई राज्यों में प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। उच्च जाति संगठनों के विरोध के मद्देनज़र UGC मुख्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और परिसर के बाहर भारी बैरिकेडिंग की गई है।
सड़कों पर उतरे संगठन, सांसदों को भेजीं चूड़ियां
रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौ रक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडे ने नियमों के विरोध में उच्च जाति के सांसदों को चूड़ियां भेजीं। इस कदम ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस को और तेज कर दिया है। विवाद का असर प्रशासनिक स्तर पर भी दिखा। उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए गणतंत्र दिवस पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सरकार ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया, जिसके बाद वे कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
जन हस्तियों की तीखी प्रतिक्रिया
कवि कुमार विश्वास सहित कई सार्वजनिक हस्तियों ने सोशल मीडिया पर नए नियमों की कड़ी आलोचना की है। वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सरकार का पक्ष रखते हुए नियमों का समर्थन किया है। जहां वामपंथी छात्र संगठनों ने OBC को शामिल किए जाने का स्वागत किया है, वहीं कुछ छात्र समूहों ने ‘जनरल’ वर्ग के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की मांग की है, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात से बचा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। दायर याचिका में इन नियमों को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए चुनौती दी गई है और भेदभाव की परिभाषा को ‘जाति-निरपेक्ष’ (Caste-neutral) बनाने की मांग की गई है।
UGC की सफाई और आगे का रास्ता
उल्लेखनीय है कि ये नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत तैयार किए गए हैं। UGC ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि 12 फरवरी तक उनकी कुछ मांगों पर विचार किया जाएगा।
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