तरणतारन, 1 फरवरी : तरणतारन ज़िले में आवारा कुत्तों की लगातार बढ़ती संख्या अब आम लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। शहरों की गलियों से लेकर बाहरी कॉलोनियों और गांवों के खेतों तक कुत्तों का झुंड खुलेआम घूमता दिखाई देता है। हालात ऐसे हैं कि रात के समय लोग घरों से बाहर निकलने से कतराने लगे हैं, वहीं सुबह गुरुद्वारों में मत्था टेकने जाने वाली संगत भी कुत्तों की दहशत में रहती है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद समाधान नहीं
यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में आने और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद जमीनी स्तर पर हल होता नजर नहीं आ रहा। प्रशासनिक प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं, जिसके चलते समस्या दिन-ब-दिन विकराल रूप लेती जा रही है। तरणतारन शहर की गलियों और बाजारों में दर्जनों आवारा कुत्तों का घूमना आम बात हो गई है। इन कुत्तों के झुंड के बीच से गुजरना तक मुश्किल हो जाता है। खासकर मांस-मछली की दुकानों के आसपास इनकी संख्या अधिक रहती है।
दुर्घटनाओं का कारण बन रहे कुत्ते
भोजन छीनने के लिए आपस में लड़ते हुए कुत्ते सड़कों तक पहुंच जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के लिए हादसों का खतरा बढ़ जाता है। कई बार अचानक सामने आ जाने से लोग गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। आवारा कुत्तों के काटने और हमलों के कारण कई लोगों की जान भी जा चुकी है। हाल ही में एक युवक को कुत्तों ने नोच-नोच कर मौत के घाट उतार दिया, जबकि एक बच्चे को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। ऐसे हमलों की खबरें आए दिन सामने आती रहती हैं।
समाज चिंतकों की चिंता, समाधान पर चुप्पी
समाज चिंतकों और बुद्धिजीवियों ने भी आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है, लेकिन इन्हें नियंत्रित करने को लेकर अब तक कोई ठोस और स्पष्ट नीति सामने नहीं आ सकी है। आम जनता प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग कर रही है, ताकि इस गंभीर समस्या से निजात मिल सके।
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