चंडीगढ़, 2 फरवरी : केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) को 2559.65 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित बजट अनुमान 2417.86 करोड़ रुपये की तुलना में 141.79 करोड़ रुपये अधिक है। पीजीआई में इमारतों के निर्माण, आधुनिक मशीनों की खरीद और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए 390 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे अस्पताल में चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
साल के अंत में मिल सकता है अतिरिक्त बजट
पीजीआई प्रशासन के अनुसार यह प्रारंभिक बजट आवंटन है। हर वर्ष की तरह इस साल भी नवंबर या दिसंबर में अनुपूरक अनुदान के माध्यम से अतिरिक्त राशि मिलने की संभावना है। यह राशि साल भर के खर्च और नई जरूरतों के आधार पर तय की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि बढ़े हुए बजट से पीजीआई में इलाज की सुविधाएं और बेहतर होंगी, आधुनिक तकनीक को बढ़ावा मिलेगा और मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
चंडीगढ़ के कुल बजट में कटौती
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में चंडीगढ़ को कुल 6983.18 करोड़ रुपये का बजट मिला था, जिसमें 6185.18 करोड़ रुपये रेवेन्यू हेड और 798 करोड़ रुपये कैपिटल हेड के लिए थे। वहीं, इस बार दोनों ही हेड्स में कटौती की गई है, जिससे यूटी प्रशासन की कई विकास योजनाओं के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। इस वर्ष पहली बार केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ नगर निगम के लिए 850 करोड़ रुपये और पीजीआई के लिए 2559.65 करोड़ रुपये सीधे जारी किए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कुल बजट में आई कमी से शहर के बुनियादी ढांचे, विकास परियोजनाओं और नई योजनाओं की रफ्तार धीमी हो सकती है। विपक्षी दलों ने चंडीगढ़ के लिए जारी किए गए इस बजट को भेदभावपूर्ण करार दिया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने यूटी के साथ न्याय नहीं किया।
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