March 25, 2026

पंजाब में धान की मिलिंग सुस्त, भंडारण संकट गहराया

पंजाब में धान की मिलिंग सुस्त...

चंडीगढ़, 6 फरवरी : पंजाब में फरवरी शुरू हो चुका है, लेकिन अक्टूबर 2025 में खरीदे गए 157 लाख टन धान में से अब तक केवल 20 प्रतिशत की ही मिलिंग हो सकी है। चार महीने बीतने के बावजूद मिलिंग की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। मिलिंग में देरी का सबसे बड़ा कारण राज्य में भंडारण की कमी है। पंजाब की कुल अनाज भंडारण क्षमता करीब 180 लाख टन है, जिसमें 120 लाख टन कवरड गोदाम और शेष खुली जगह शामिल है। फिलहाल सभी गोदाम पहले से भरे हुए हैं। इस समय पंजाब में लगभग 130 लाख टन चावल और 50 लाख टन गेहूं स्टॉक में मौजूद है।

एफसीआई का निर्देश, खर्च मिलरों पर

चावल को खुले में स्टोर नहीं किया जा सकता। इसी कारण एफसीआई ने मिलरों से राजस्थान, उत्तर प्रदेश और जम्मू जैसे पड़ोसी राज्यों में खाली कवरड स्थानों पर चावल भेजने को कहा है। हालांकि केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि अंतरराज्यीय परिवहन का खर्च वहन नहीं किया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ की अगुवाई में पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर चावल की धीमी आवाजाही का मुद्दा उठाने की योजना बनाई थी। लेकिन संसद में व्यस्तता के कारण बैठक नहीं हो सकी। एसोसिएशन अध्यक्ष तरसेम सिंह सैनी ने बताया कि यह बैठक अब दो-तीन दिनों में होगी।

मिलरों पर बढ़ता आर्थिक बोझ

तरसेम सिंह सैनी ने कहा कि कई मिलर अपनी क्षमता से अधिक धान स्टोर कर रहे हैं, लेकिन चावल को दूसरे राज्यों में अपने खर्च पर भेजना पड़ रहा है, जबकि चावल की लागत केंद्र सरकार वहन करती है। उन्होंने इस व्यवस्था को अनुचित बताया। राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण बिंटा ने एफसीआई के अनाज प्रबंधन में व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अंतरराज्यीय सप्लाई का पूरा वित्तीय बोझ मिलरों पर डाला जा रहा है।

दूसरे राज्यों में चावल रखने की प्रथा गलत

तरसेम सैनी ने मिलरों द्वारा अपने खर्च पर दूसरे राज्यों में चावल रखने की प्रथा की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पंजाब के भीतर परिवहन खर्च एफसीआई उठाता है, लेकिन बाहर भेजने पर नहीं। इससे पूरी मार्केट खतरे में पड़ रही है। मिलरों ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, धान सूखने लगेगा। इससे मिलिंग के दौरान नमी कम होगी और लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

मुख्यमंत्री माने भी उठाया मुद्दा

मुख्यमंत्री भगवंत मान इस समस्या को लेकर अब तक तीन बार केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने गोदाम खाली कराने और नई फसल के लिए जगह बनाने हेतु पंजाब से चावल दूसरे राज्यों में तेजी से भेजने की मांग की है। बावजूद इसके चावल की आवाजाही में तेजी नहीं आ सकी है। अप्रैल के मध्य में नई गेहूं की आवक शुरू होने वाली है। ऐसे में अगर मौजूदा स्टॉक नहीं निकाला गया तो भंडारण संकट और गहरा सकता है।

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