February 9, 2026

“किसी भी जाति का व्यक्ति बन सकता है सरसंघचालक” : मोहन भागवत

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नई दिल्ली, 8 फरवरी : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सरसंघचालक पद को लेकर बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। मुंबई में आयोजित एक व्याख्यान श्रृंखला के दौरान उन्होंने कहा कि सरसंघचालक बनने के लिए ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है और SC/ST सहित किसी भी जाति का व्यक्ति यह पद संभाल सकता है।

“हिंदू होना ही एकमात्र योग्यता”

मोहन भागवत ने कहा कि RSS में किसी भी कार्यकर्ता की नियुक्ति उसकी जाति देखकर नहीं की जाती। उन्होंने स्पष्ट किया, “जो काम करेगा, वही आगे बढ़ेगा। संघ में यह नहीं देखा जाता कि कौन किस जाति का है।” RSS प्रमुख ने कहा कि सरसंघचालक पद के लिए ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र होना कोई मापदंड नहीं है। उन्होंने कहा, “जो हिंदू है, वही सरसंघचालक बन सकता है। SC/ST समाज से आने वाला व्यक्ति भी इस पद पर आ सकता है।”

अब पूरे समाज तक फैला है संघ

मोहन भागवत ने संघ के शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि जब RSS की शुरुआत हुई थी, तब इसका काम एक छोटी ब्राह्मण बस्ती से शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, “उस समय स्वाभाविक रूप से अधिकतर पदों पर ब्राह्मण ही थे, जिससे यह धारणा बनी कि संघ केवल ब्राह्मणों का संगठन है, लेकिन यह सच नहीं है। RSS प्रमुख ने बताया कि अब संघ का व्यापक विस्तार हो चुका है। उन्होंने कहा कि संगठन जाति के आधार पर नहीं, बल्कि भौगोलिक क्षेत्रों के अनुसार काम करता है, जिससे सभी समुदायों और जातियों के लोग स्वतः जुड़ते हैं।

“SC-ST होना अयोग्यता नहीं”

मोहन भागवत ने दो टूक कहा कि आज संघ के अखिल भारतीय स्तर पर सभी जातियों के लोग मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “यह संघ की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। SC-ST होना कोई अयोग्यता नहीं है और ब्राह्मण होना कोई विशेष योग्यता नहीं।”

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