February 11, 2026

भ्रष्टाचार मामले में मनप्रीत बादल को राहत, हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत की पुष्टि की

भ्रष्टाचार मामले में मनप्रीत बादल को राहत...

चंडीगढ़, 11 फरवरी : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को भ्रष्टाचार के एक मामले में दी गई अंतरिम अग्रिम जमानत को स्थायी रूप से पुष्टि कर दी है। जस्टिस त्रिभुवन दहिया की पीठ ने वर्ष 2023 में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।

क्या है मामला?

यह मामला एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मनप्रीत बादल ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए वर्ष 2021 में बठिंडा विकास प्राधिकरण (बीडीए) पर कुछ प्लॉट्स की कम दर पर नीलामी करने के लिए दबाव डाला था। आरोप यह भी था कि नीलामी प्रक्रिया में जनभागीदारी सीमित करने के उद्देश्य से साइट प्लान समय पर अपलोड नहीं किए गए, जिससे कथित तौर पर बादल के करीबी लोगों को लाभ हुआ। कहा गया कि इन लोगों ने रिजर्व कीमत के आसपास प्लॉट हासिल किए, जिससे राज्य को राजस्व का नुकसान हुआ।

बचाव पक्ष की दलीलें

मनप्रीत बादल की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है और यह जांच राजनीतिक हस्तक्षेप का परिणाम है। बचाव पक्ष ने कहा कि नीलामी पूरी तरह ई-नीलामी के माध्यम से की गई थी, जो सभी इच्छुक प्रतिभागियों के लिए खुली थी और किसी को भी बोली प्रक्रिया में भाग लेने से रोकना संभव नहीं था।

अदालत को बताया गया कि संबंधित प्लॉट की रिजर्व कीमत ₹29,900 प्रति वर्ग मीटर निर्धारित थी, जबकि प्लॉट ₹30,348.5 प्रति वर्ग मीटर की दर से खरीदे गए, जो रिजर्व कीमत से अधिक थी। यह भी कहा गया कि बाद में मनप्रीत बादल ने उक्त प्लॉट मूल अलॉटियों से प्रीमियम पर खरीदे और करीब ₹25 लाख की स्टांप ड्यूटी भी अदा की। प्लॉट खरीदने के लिए धनराशि उनके निजी फ्लैट की बिक्री से प्राप्त हुई थी, न कि किसी अवैध स्रोत से।

हाईकोर्ट का फैसला

राज्य सरकार के जवाब और रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी को पहले ही जांच के दौरान अंतरिम अग्रिम जमानत दी जा चुकी थी। अब तक ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है जिससे यह लगे कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया या जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया हो। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अंतरिम अग्रिम जमानत को नियमित अग्रिम जमानत में परिवर्तित कर दिया।

जांच जारी रहेगी

अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत की पुष्टि मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला नहीं है। जांच एजेंसियां कानून के अनुसार अपनी जांच जारी रखने के लिए स्वतंत्र हैं।

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