February 11, 2026

हाईकोर्ट ने 2011-12 की नियुक्तियां रद्द करने का आदेश किया निरस्त

हाईकोर्ट ने 2011-12 की नियुक्तियां...

चंडीगढ़, 11 फरवरी : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब मंडी बोर्ड द्वारा वर्ष 2011-12 में की गई नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मंडी बोर्ड के सचिव के पास ऐसी कार्रवाई करने का विधिक अधिकार ही नहीं था। साथ ही कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में कोई कमी थी तो उसे अधिकतम ‘अनियमितता’ माना जा सकता है, ‘अवैधता’ नहीं।

क्या था मामला?

रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2011-12 के दौरान क्लर्क, ऑक्शन रिकॉर्डर, चौकीदार, चपरासी और केयरटेकर जैसे पदों पर नियुक्त किया गया था। इन नियुक्तियों की सिफारिश संबंधित मार्केट कमेटियों ने अपने प्रस्तावों के माध्यम से की थी। बाद में मंडी बोर्ड के सचिव ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं जैसे विज्ञापन का केवल एक अखबार में प्रकाशन और मार्च 2011 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के निर्देशों का पालन न करने का हवाला देते हुए इन प्रस्तावों को रद्द कर दिया था।

सचिव के पास नहीं था अधिकार: हाईकोर्ट

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने अपने फैसले में कहा कि पंजाब कृषि उपज बाजार अधिनियम, 1961 की धारा 33(4) के तहत बोर्ड अपनी शक्तियां सरकार की पूर्व स्वीकृति से किसी अधिकारी को सौंप सकता है। हालांकि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला कि मंडी बोर्ड ने स्वयं कोई प्रस्ताव पारित कर सचिव को यह अधिकार सौंपा हो।

अदालत ने यह भी माना कि वर्ष 2002 में राज्य सरकार द्वारा दी गई स्वीकृति तब तक प्रभावी नहीं मानी जा सकती, जब तक बोर्ड का विधिवत प्रस्ताव मौजूद न हो। इसी आधार पर सचिव द्वारा पारित आदेशों को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए निरस्त कर दिया गया।

मीटिंग के मिनट्स को नहीं माना विधिक आधार

हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली बैठक के मिनट्स पर मंडी बोर्ड की निर्भरता को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे मिनट्स न तो विधायी नियम हैं और न ही कार्यकारी आदेश, इसलिए वे 1989 के सेवा नियमों को निष्प्रभावी नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति स्वीकृत पदों पर निर्धारित योग्यता के आधार पर और बिना किसी धोखाधड़ी के हुई हो, उनकी नियुक्ति को केवल प्रक्रिया संबंधी खामियों के आधार पर शून्य नहीं ठहराया जा सकता। इस फैसले से प्रभावित कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है और उनकी सेवाएं बहाल होने का रास्ता साफ हो गया है।

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