मुंबई, 13 फरवरी : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में रजिस्टर्ड निवेशकों के खातों ने एक बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया है। एक्सचेंज द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार फरवरी 2026 में कुल यूनिक ट्रेडिंग खाते या क्लाइंट कोड (UCCs) की संख्या 25 करोड़ (250 मिलियन) से अधिक हो गई है।
दो महीनों में जुड़े एक करोड़ नए खाते
सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि ताजा एक करोड़ खाते सिर्फ दो महीनों में जुड़े हैं, जो पूंजी बाजारों में तेजी से बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। पिछले 5 करोड़ खाते—जो कुल का लगभग 20 प्रतिशत हैं—पिछले 16 महीनों में जुड़े हैं। एनएसई के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक कुल 12.7 करोड़ यूनिक रजिस्टर्ड निवेशक थे। चूंकि कई निवेशकों के एक से अधिक ब्रोकरों के पास खाते हैं, इसलिए कुल ट्रेडिंग खातों की संख्या यूनिक निवेशकों से अधिक है।
राज्यों में महाराष्ट्र सबसे आगे
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र 4.2 करोड़ (17 प्रतिशत) खातों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद उत्तर प्रदेश (2.8 करोड़), गुजरात (2.2 करोड़) और पश्चिम बंगाल व राजस्थान (1.4-1.4 करोड़) का स्थान है। इस तेज वृद्धि का श्रेय तेज डिजिटलीकरण, फिनटेक क्रांति, कम लागत वाले ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और बढ़ते मध्यम वर्ग को दिया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में निफ्टी 50 ने 11.3 प्रतिशत और निफ्टी 500 ने 13.7 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न दिया है, जिससे घरेलू निवेशकों का इक्विटी बाजार में भरोसा मजबूत हुआ है।
एसआईपी निवेश में भी तेज उछाल
अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच लगभग 6 करोड़ नए एसआईपी खाते खोले गए हैं। औसत मासिक एसआईपी निवेश बढ़कर 28,766 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।दिसंबर 2025 तक एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गई है, जो भारतीय शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

More Stories
अब बदतमीज़ी नहीं कर पाएंगे रिकवरी एजेंट, RBI ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश
शुरुआती कारोबार में बाजार 1% से अधिक लुढ़का
114 राफेल और 6 P-8I विमान सौदे को मंजूरी, रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला