श्रीनगर, 14 फरवरी : पुलवामा हमले को आज सात साल पूरे हो गए हैं। 14 फरवरी 2019 को लेथपोरा में श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए भीषण आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। यह हमला उस समय हुआ जब पूरी दुनिया वेलेंटाइन डे मना रही थी, लेकिन देश के लिए यह दिन शहादत और संकल्प का प्रतीक बन गया।
हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी, जिसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन प्राप्त होने के आरोप लगे। इस घटना ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया।
भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक से दिया कड़ा जवाब
पुलवामा हमले के बाद भारत ने 26 फरवरी 2019 को बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमला किया, जिसे ऑपरेशन बंदर के नाम से जाना गया। लगभग पांच दशक बाद पहली बार भारतीय वायुसेना ने दुश्मन देश की सीमा के अंदर प्रवेश कर कार्रवाई की। इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई रणनीति के रूप में देखा गया।
धारा 370 हटने से बड़ा बदलाव
हमले के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में लागू धारा 370 को समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। इस कदम को आतंकवाद और अलगाववाद के ढांचे को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आतंकी भर्ती और हिंसक घटनाओं में कमी दर्ज की गई है।
‘ब्लैक डे’ नहीं, ‘संकल्प दिवस’
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार, हमले की योजना पहले बनाई गई थी, लेकिन मौसम खराब होने के कारण तारीख आगे बढ़ाई गई। जम्मू-कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट अजात जमवाल का कहना है कि कुछ लोग 14 फरवरी को ‘ब्लैक डे’ कहते हैं, लेकिन कई लोगों के लिए यह दिन शहीदों के बलिदान को याद करते हुए आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाने का ‘संकल्प दिवस’ है। सात साल बाद भी पुलवामा के शहीदों का बलिदान देश की स्मृति में जीवित है और यह दिन आतंकवाद के खिलाफ भारत की अडिग इच्छाशक्ति का प्रतीक बना हुआ है।

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