बठिंडा, 15 फरवरी : मधुमक्खी पालन के व्यवसाय को अपनाकर ग्रामीण किसान महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि वे किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं और अपने दम पर सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं। गांव दयालपुरा भाईका और भगता ब्लॉक के अन्य गांवों की महिलाओं ने एक ओंकार सेल्फ हेल्प ग्रुप के माध्यम से संगठित होकर मधुमक्खी पालन का कार्य शुरू किया।
वर्ष 2020 में पांच सदस्यीय टीम ने 50 बक्सों से इस व्यवसाय की शुरुआत की थी। आज उनके पास 2500 मधुमक्खी बक्से हैं और समूह से लगभग 200 सदस्य जुड़ चुके हैं।
अलग-अलग राज्यों में करती हैं प्रवास
समूह की सदस्य जसवीर कौर ने बताया कि वर्षभर विभिन्न प्रकार के शहद के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों को हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के अलग-अलग जिलों में ले जाया जाता है। इससे बरी, सरसों, सफेदा, टाहली, लीची, कीकर, अजवाइन, धनिया और बरसीम जैसे विभिन्न फूलों से शहद तैयार किया जाता है। समूह द्वारा उत्पादित शहद और उससे बने अन्य उत्पाद ‘आजीविका हनी’, ‘कौर हनी’ और ‘कुदरत हनी’ ब्रांड नाम से बेचे जाते हैं।
महिलाएं स्वयं शहद की प्रोसेसिंग और पैकिंग कर बाजार में बिक्री करती हैं। भगता-बरनाला रोड स्थित गांव दयालपुरा भाईका में उनका अपना बिक्री केंद्र भी संचालित है। इसके अलावा विभिन्न प्रदर्शनियों और मेलों में भी स्टॉल लगाकर उत्पादों का विपणन किया जाता है।
सरकारी सहयोग से मिला विस्तार
बागवानी विभाग पंजाब और पंजाब राज्य ग्रामीण मिशन के सहयोग से समूह को वित्तीय सहायता मिली। साथ ही Punjab Agro की ओर से 10 लाख रुपये का सब्सिडी प्रोजेक्ट प्रदान किया गया, जिससे शहद की प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को और मजबूती मिली है। जसवीर कौर ने बताया कि सरसों के फूलों से तैयार शहद कम तापमान में प्राकृतिक रूप से जम जाता है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग इसे मिलावटी समझ लेते हैं। इस समस्या के समाधान और बेहतर विपणन तकनीकों के लिए समूह कृषि विभाग के मार्केटिंग विंग से लगातार संपर्क में है।

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