चंडीगढ़, 17 फरवरी : Punjab and Haryana High Court ने आज ‘बैंड बाजा’ मामले में विपक्ष के नेता Pratap Singh Bajwa को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनके खिलाफ Punjab State Scheduled Castes Commission द्वारा शुरू की गई कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
अनुसूचित जाति आयोग एक्ट के प्रावधानों के तहत बाजवा को जारी किए गए नोटिस को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस सुवीर सहगल ने बाजवा की याचिका पर पंजाब सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई अब 26 मई को होगी।
क्या है पूरा विवाद?
बताया जाता है कि माजे क्षेत्र में कांग्रेस रैली के दौरान दिए गए भाषण में बाजवा द्वारा कही गई कुछ बातों पर विवाद खड़ा हो गया था। कैबिनेट मंत्री Harbhajan Singh ETO ने इन टिप्पणियों को अपने पारिवारिक पेशे से जोड़ते हुए बाजवा पर आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया था।
इसके बाद आयोग के चेयरमैन Jasbir Singh Garhi ने मामले का संज्ञान लेते हुए बाजवा को नोटिस जारी कर तलब किया था। पहली पेशी पर बाजवा आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुए थे।
‘नोटिस असंवैधानिक’
बाजवा की ओर से अदालत में दलील दी गई कि आयोग द्वारा जारी नोटिस गैरकानूनी और असंवैधानिक है। यह संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि उनके भाषण में किसी भी जाति विशेष के खिलाफ कुछ नहीं कहा गया था और न ही अनुसूचित जाति या जनजाति से संबंधित कोई टिप्पणी की गई थी।
अदालत के फैसले के बाद बाजवा ने कहा कि “सच्चाई की जीत हुई है। मुझे न्याय मिला है और आम आदमी पार्टी की चाल नाकाम रही है।” फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयोग की कार्रवाई पर रोक लग गई है और अगली सुनवाई 26 मई को होगी।
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