चंडीगढ़, 18 फरवरी पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। अदालत ने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को उनके जीवन पर संभावित खतरे का नए सिरे से आकलन करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ताजा खतरा मूल्यांकन रिपोर्ट अगली सुनवाई पर सीलबंद लिफाफे में पेश की जाए और तब तक उनकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।
जेल से रिहाई के बाद सुरक्षा पर सवाल
सुनवाई के दौरान बेंच ने पंजाब सरकार से पूछा कि क्या मजीठिया की जेल से रिहाई के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर कोई खतरा मूल्यांकन किया गया है। अदालत ने इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट जानकारी के अभाव पर असंतोष जताया। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर ठोस और अद्यतन जानकारी देना आवश्यक है।
15 पुलिसकर्मी तैनात, पर्याप्तता पर सवाल
सरकार ने अदालत को बताया कि मजीठिया की सुरक्षा के लिए फिलहाल 15 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इस पर अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या संभावित खतरे के स्तर को देखते हुए यह सुरक्षा पर्याप्त है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मजीठिया को भी सीलबंद लिफाफे में उनके जीवन पर वास्तविक खतरे की स्थिति से अवगत कराया जाए, ताकि वे आवश्यक एहतियाती कदम उठा सकें।
हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि पंजाब के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के साथ समन्वय कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। इस रिपोर्ट में खतरे के स्तर, खुफिया एजेंसियों से प्राप्त इनपुट और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। साथ ही केंद्र सरकार को भी संबंधित एजेंसियों के माध्यम से स्वतंत्र खतरा मूल्यांकन कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।
सुरक्षा में ढिलाई बर्दाश्त नहीं
अदालत ने स्पष्ट किया कि नई समीक्षा पूरी होने तक मजीठिया की सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढिलाई या कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी प्रकार की सुरक्षा चूक पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। इस दिन केंद्र और राज्य सरकारों को अदालत के समक्ष संयुक्त तथा अलग-अलग खतरा मूल्यांकन रिपोर्टें प्रस्तुत करनी होंगी।
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