चंडीगढ़, 18 फरवरी : पंजाब कांग्रेस में एकजुटता के दावों के बीच अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। हाल ही में पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल द्वारा वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, सांसदों, जिला अध्यक्षों और पूर्व विधानसभा उम्मीदवारों के साथ की गई बैठक में कई नेताओं ने दबे शब्दों में एक-दूसरे पर निशाना साधा। सूत्रों के मुताबिक, कई नेताओं ने सुझाव दिया कि हर नेता से पांच-पांच मिनट की अलग बैठक की जाए ताकि जमीनी हकीकत सामने आ सके।
उनका कहना था कि जो रिपोर्ट पेश की जा रही है, वह पूरी तरह सही नहीं है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सुझाव दिया कि सांसदों को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट न दी जाए या उन्हें चुनाव न लड़ाया जाए।
चन्नी का दर्द: “गलत प्रोपेगेंडा किया जा रहा”
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बैठक में कहा कि उन्हें बदनाम करने की साजिश की जा रही है और उनके खिलाफ गलत प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और यदि पार्टी कहे तो वह घर बैठने को भी तैयार हैं। चन्नी ने अपनी एक वीडियो लीक किए जाने पर भी नाराजगी जताई। बताया जाता है कि हाल ही में अनुसूचित जाति विंग की बैठक में दिए गए उनके बयान का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने दलितों की बजाय जाट समुदाय को उच्च पद दिए जाने की बात कही थी। इस वीडियो पर सोशल मीडिया में काफी प्रतिक्रियाएं आई थीं।
भाजपा में शामिल होने पर भी चर्चा
पूर्व मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ के भाजपा में जाने के मुद्दे पर चर्चा हुई। इस पर कहा गया कि वह दुखी होकर पार्टी छोड़कर गए थे। पूर्व विधायक परविंदर सिंह पिंकी ने कहा कि कोई भी नेता कांग्रेस की टिकट के बिना जीत हासिल नहीं कर सकता, इसलिए सभी को मिलकर पार्टी को मजबूत करना चाहिए।
दो दिन की बैठक का सुझाव
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष समशेर सिंह दुलो ने भी नेताओं से अलग-अलग मुलाकात के सुझाव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बड़ी बैठक में खुलकर बात करने से किसी को ठेस पहुंच सकती है, इसलिए कम से कम दो दिन की विस्तृत बैठक रखी जानी चाहिए ताकि सभी की बात सुनी जा सके। बैठक में आने वाले दिनों में राहुल गांधी की रैली कराने का प्रस्ताव भी सामने आया। साथ ही, यह सुझाव दिया गया कि फिलहाल यूथ कांग्रेस के चुनाव न कराए जाएं क्योंकि यह उचित समय नहीं है। कुछ नेताओं ने मनरेगा जैसे मुद्दों पर रैलियां और जनसभाएं आयोजित करने की भी बात कही।
नेतृत्व में एकजुटता की जरूरत
सूत्रों के अनुसार, कई नेताओं का मानना है कि जनता अगली चुनावों में कांग्रेस की वापसी की संभावना देख रही है, लेकिन वह पार्टी नेतृत्व को एकजुट देखना चाहती है। अब देखना होगा कि पार्टी इन मतभेदों को कैसे सुलझाती है और आगामी चुनावों के लिए कैसी रणनीति बनाती है।
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