चंडीगढ़ , 20 फरवरी : चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति की बची हुई अवधि के दौरान इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों को वित्तीय प्रोत्साहन मिलने की संभावना बेहद कम है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, भले ही पिछले वर्ष जुलाई में कोटा 1,500 यूनिट बढ़ाया गया था, लेकिन इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई।
2,000 से बढ़ाकर 3,500 यूनिट करने का प्रस्ताव
यूटी इलेक्ट्रिक व्हीकल एडवाइजरी कमेटी के प्रस्ताव पर 31 जुलाई को यूटी प्रशासन ने प्रोत्साहन के लिए पात्र इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों की सीमा 2,000 से बढ़ाकर 3,500 यूनिट कर दी थी। प्रस्ताव को वित्त विभाग को भेजा गया था और वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे अंतिम स्वीकृति के लिए Ministry of Home Affairs को भेजा जाना था।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि ईवी नीति की पांच साल की अवधि अगले वर्ष समाप्त हो रही है, ऐसे में प्रस्ताव को आगे बढ़ाए जाने की संभावना कम है। संबंधित विभाग नई जरूरतों के अनुसार नीति में संशोधन कर सकता है।
1 से 1.5 लाख रुपये तक था लाभ
यूटी प्रशासन ने इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक का वित्तीय लाभ देने की पेशकश की थी। सितंबर 2022 में लागू पांच वर्षीय नीति के तहत पहली 2,000 कारों का कोटा पिछले वर्ष की शुरुआत में पूरा हो गया था, जिसके बाद प्रोत्साहन बंद कर दिया गया। पिछले वर्ष 1 अगस्त को कोटा बढ़ाने के बाद करीब 250 वाहन मालिकों ने प्रोत्साहन के लिए आवेदन किया था।
20,000 से अधिक ईवी पंजीकृत
चंडीगढ़ की ईवी नीति लागू होने के साढ़े तीन वर्षों में शहर में 20,000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है। इनमें लगभग 7,000 ई-टू-व्हीलर और करीब 4,000 ई-कारें शामिल हैं। प्रशासन ने आरएलए कार्यालय के माध्यम से मुफ्त रजिस्ट्रेशन जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी दी हैं, ताकि शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत तक पहुंचाई जा सके।
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