February 20, 2026

एलएमएचपी फेलोज नशा मुक्ति अभियान की ‘आस की किरण’ बनें: डॉ. बलबीर सिंह

एलएमएचपी फेलोज नशा मुक्ति अभियान की...


चंडीगढ़, 20 फरवरी : पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति अभियान को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एलएमएचपी) के पहले बैच के फेलोज से मुलाकात की। यह पहल राज्य सरकार की ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य नशे पर रोक लगाना और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।

‘लाइटहाउस’ की भूमिका निभाएंगे फेलोज

किसान भवन में आयोजित विचार-विमर्श के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने एलएमएचपी फेलोज को नशे के खिलाफ पंजाब की निर्णायक लड़ाई में ‘लाइटहाउस’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि नशे से जूझ रहा व्यक्ति समुद्र में तूफान में फंसे जहाज की तरह होता है—अशांत और दिशाहीन। जैसे लाइटहाउस जहाजों को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाता है, वैसे ही फेलोज नशा पीड़ितों और उनके परिवारों को मुख्यधारा और स्थिर जीवन की ओर ले जाएंगे।

जिम्मेदारी अहम और परिवर्तनकारी

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि फेलोज को सौंपी गई जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी है। यह यात्रा धैर्य और सहानुभूति की मांग करती है। उन्होंने कहा कि लोगों को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालना किसी पुरस्कार से कम नहीं है। फेलोज को सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में शामिल कर प्रक्रियाओं के मानकीकरण, निगरानी तंत्र को मजबूत करने और जिला स्तर पर संस्थागत क्षमता निर्माण पर कार्य किया जाएगा।

देश की पहली विशेष फेलोशिप

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यह भारत की पहली फेलोशिप है, जो विशेष रूप से प्रणालीगत मानसिक स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण के माध्यम से नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम पर केंद्रित है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के सहयोग से तैयार यह कार्यक्रम नशा मुक्ति केंद्रों, ओओएटी केंद्रों और जिला प्रशासन को निगरानी, क्षमता निर्माण और समन्वय में सहयोग देने के लिए प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों को तैनात करता है।

स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता

उन्होंने बताया कि फेलोज युवाओं में नशे की शुरुआत को रोकने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर सक्रिय रूप से संपर्क करेंगे। इस प्रकार रोकथाम, उपचार और पुनर्वास को एक व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे से जोड़ा जाएगा।

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राष्ट्रीय स्तर की चुनौती

डॉ. बलबीर सिंह ने जोर देकर कहा कि नशाखोरी केवल पंजाब की समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य चुनौती है, जिसके समाधान के लिए निरंतर और संरचित हस्तक्षेप की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि एलएमएचपी मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रभावी ढांचा साबित हो सकता है।

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