नई दिल्ली, 27 फरवरी : नई दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा।
अदालत की कड़ी टिप्पणी
विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) जितेंद्र सिंह ने कहा कि गंभीर आरोपों के लिए मजबूत साक्ष्य आवश्यक होते हैं और केवल धारणाओं के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ठोस प्रमाणों के अभाव में किसी केंद्रीय साजिश की बात कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकती। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि दावों की पुष्टि साक्ष्यों से नहीं होती तो इससे उच्च पदों पर जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है।
CBI और ED की जांच
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने की थी। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि अब वापस ली जा चुकी आबकारी नीति में कथित अनियमितताएं की गईं और इसमें नेताओं की अहम भूमिका थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था। यह मामला वर्ष 2022 में दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा CBI को दी गई शिकायत के बाद शुरू हुआ। इसके आधार पर एजेंसी ने एफआईआर दर्ज की थी। जांच एजेंसियों का आरोप था कि आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके नेताओं ने नीति में कथित हेरफेर कर शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाया और रिश्वत ली।
आबकारी नीति और विवाद
दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 को नई आबकारी नीति लागू की थी, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सितंबर 2022 के अंत में इसे वापस ले लिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार नई नीति के तहत थोक विक्रेताओं का लाभ मार्जिन 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया गया था, जिससे कथित रूप से कार्टेलाइजेशन को बढ़ावा मिला। हालांकि, मनीष सिसोदिया ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि नई नीति से सरकार के राजस्व में वृद्धि होने की संभावना थी।
बरी होने के बाद केजरीवाल की प्रतिक्रिया
अदालत से बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल भावुक नजर आए। उन्होंने मीडिया से कहा, “मैंने अपने जीवन में ईमानदारी कमाई है। मेरे खिलाफ झूठा केस किया गया, लेकिन अदालत ने साबित कर दिया कि केजरीवाल और सिसोदिया ईमानदार हैं और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार है।” इस फैसले को दिल्ली की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

More Stories
JEE Main 2026 सत्र-2 के लिए करेक्शन विंडो एक्टिव
सावधान! 8वें वेतन आयोग और FASTag के नाम पर साइबर ठगी
सुज़ुकी का पहला EV स्कूटर eAccess: 7 साल की वारंटी के साथ