न्यूयॉर्क, 28 फरवरी : कोई भी व्यक्ति बूढ़ा होना नहीं चाहता, लेकिन बढ़ती उम्र एक अटल सच्चाई है। हालांकि, उम्र बढ़ने को लेकर लगातार चिंता करना सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की एक नई शोध में यह सामने आया है कि उम्र बढ़ने, खासकर भविष्य में होने वाली बीमारियों के डर से जुड़ी चिंता, कोशिकीय स्तर पर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है।
700 से अधिक महिलाओं पर हुआ अध्ययन
यह अध्ययन 700 से अधिक महिलाओं पर किया गया। शोध में पाया गया कि जिन महिलाओं को उम्र बढ़ने को लेकर अधिक चिंता थी, उनके खून में जैविक उम्र तेजी से बढ़ने के संकेत मिले। इन संकेतों को आधुनिक ‘एपिजेनेटिक क्लॉक्स’ की मदद से मापा गया, जो शरीर की वास्तविक जैविक उम्र का आकलन करने का वैज्ञानिक तरीका है।
शोध के अनुसार, स्वास्थ्य गिरावट, बीमारी और आत्मनिर्भरता खोने का डर महिलाओं में कोशिकीय स्तर पर तेजी से उम्र बढ़ने से जुड़ा पाया गया। हालांकि, सुंदरता या प्रजनन क्षमता को लेकर की गई चिंताओं का जैविक उम्र पर कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं दिखा।
मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक असर का संबंध
अध्ययन की शोधकर्ता मारियाना रोड्रिगेज ने कहा कि उम्र बढ़ने से जुड़ी चिंता में बीमारी, शारीरिक कमजोरी और स्वतंत्रता खोने का भय शामिल होता है। उन्होंने बताया कि पहले की शोधों में चिंता, अवसाद और सामान्य मानसिक स्वास्थ्य का संबंध कई शारीरिक स्वास्थ्य परिणामों से पाया गया है, लेकिन उम्र बढ़ने की चिंता और वास्तविक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के बीच संबंध पर अब तक ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि सकारात्मक सोच, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सामाजिक जुड़ाव मानसिक तनाव को कम कर सकते हैं, जिससे स्वस्थ और संतुलित जीवन जिया जा सकता है।
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