चंडीगढ़, 11 मार्च : पंजाब विधानसभा ने आज सर्वसम्मति से प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया। इस दौरान भाजपा के विधायक सदन से गैरहाजिर रहे, जबकि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। पंजाब इस समझौते के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने वाला देश का पहला गैर-भाजपा शासित राज्य बन गया है।
कृषि क्षेत्र को समझौते से बाहर रखने की मांग
मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने इस समझौते को पंजाब के लिए बेहद नुकसानदायक बताते हुए मांग की कि प्रस्तावित समझौते के दायरे से कृषि क्षेत्र को बाहर रखा जाए। उन्होंने कहा कि पंजाब ने पहले भी तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में किसान आंदोलन की अगुवाई की थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi को कानून वापस लेने पड़े थे।
केंद्र सरकार पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के जीएसटी, ग्रामीण विकास फंड और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बकाए भी केंद्र सरकार ने रोक रखे हैं। उनके अनुसार यह प्रस्तावित समझौता कृषि क्षेत्र के लिए तीन कृषि कानूनों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। इससे पहले बहस के दौरान शिक्षा मंत्री Harjot Singh Bains ने इस समझौते को अनाज और बीज की आत्मनिर्भरता पर हमला बताया।
वहीं विधायक Kuldeep Singh Dhaliwal ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार देश को अमेरिका के सामने गिरवी रख रही है। विधायक Gurpreet Wana Wali ने कहा कि अमेरिका से आने वाले बीजों से देशी बीजों को नुकसान होगा और पंजाब की फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री प्रभावित हो सकती है।
कृषि अर्थव्यवस्था पर खतरे की आशंका
कैबिनेट मंत्री Laljit Singh Bhullar ने कहा कि यह समझौता पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकता है। विधायक Pargat Singh ने कहा कि भारतीय और अमेरिकी कृषि प्रणाली में काफी अंतर है। उन्होंने कपास पर 11 प्रतिशत ड्यूटी कम करने के मुद्दे को भी उठाया। अकाली दल के विधायक Manpreet Singh Iyali ने कहा कि नया समझौता कृषि और डेयरी सेक्टर को नुकसान पहुंचा सकता है।
बहस में Rana Gurjit Singh, Dinesh Chadha, Sherry Kalsi, Narinderpal Sawna और Jagdeep Singh Goldy Kamboj सहित कई विधायकों ने हिस्सा लिया।
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