चंडीगढ़, 11 मार्च : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश के कृषि क्षेत्र के लिए तीन विवादित कृषि कानूनों से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारत का बाजार खोलना पंजाब सहित पूरे देश के किसानों के लिए गंभीर चुनौती बन जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया है।
तीन कृषि कानूनों से भी ज्यादा खतरनाक समझौता
पंजाब विधानसभा में चर्चा के समापन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित यह समझौता किसानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पहले लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में ऐतिहासिक किसान आंदोलन हुआ था, लेकिन यह समझौता उनसे भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के कृषि बाजार को अमेरिका के लिए खोलना देश की कृषि संप्रभुता को कमजोर कर सकता है और इससे विदेशी कंपनियों का प्रभाव बढ़ेगा।
राज्यों से नहीं लिया गया कोई परामर्श
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस समझौते को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि न तो किसी राज्य सरकार को इसकी जानकारी दी गई और न ही उनसे कोई राय ली गई। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि केंद्र सरकार इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए इतनी उत्सुक दिखाई दे रही है।
अमेरिकी उत्पादों से मुकाबला करना मुश्किल
भगवंत सिंह मान ने कहा कि अमेरिका में कृषि संरचना भारत से बिल्कुल अलग है। वहां बड़े खेत, अधिक सब्सिडी और बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण किसान कम कीमत पर भी निर्यात कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी सोयाबीन, मक्का, कपास और अन्य कृषि उत्पाद भारत में सस्ते बिकने लगेंगे तो भारतीय किसानों के लिए उनसे प्रतिस्पर्धा करना बेहद कठिन हो जाएगा।
मक्का, सोयाबीन और कपास किसानों पर पड़ेगा असर
मुख्यमंत्री ने कहा कि अमेरिका से सस्ते फीड और सोया उत्पादों के आयात से मक्का और सोयाबीन की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इससे पंजाब में फसल विविधीकरण के प्रयासों को बड़ा झटका लगेगा। उन्होंने बताया कि पंजाब में लगभग 1.25 लाख हेक्टेयर में मक्का और करीब 2.5 लाख एकड़ में कपास की खेती होती है, जिस पर इस समझौते का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
केंद्र सरकार पर लगाए कई आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब के आरडीएफ, जीएसटी और एनएचएम फंड रोककर किसान आंदोलन का बदला ले रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या भारत के फैसले अब विदेशों के दबाव में लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले केंद्रीय बजट का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा कृषि क्षेत्र को दिया जाता था, लेकिन अब इसे घटाकर लगभग 7 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में निवेश कम होना चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि उत्पादों को विदेशों में कड़े परीक्षण से गुजरना पड़ता है, जबकि अमेरिका से आने वाले उत्पादों को अक्सर वहां की प्रयोगशालाओं की मंजूरी के आधार पर स्वीकार कर लिया जाता है।
यह भी देखें : पंजाब विधानसभा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ प्रस्ताव पास

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