नई दिल्ली, 13 मार्च : दुनिया भर में कई ऐसी मान्यताएँ और अंधविश्वास मौजूद हैं जो लोगों के मन में डर पैदा कर देते हैं। इन्हीं में से एक है ‘फ्राइडे द 13थ’ (Friday the 13th)। पश्चिमी देशों में जब किसी महीने की 13 तारीख शुक्रवार को पड़ती है, तो इसे बेहद अशुभ माना जाता है। साल 2026 में यह संयोग एक नहीं बल्कि तीन बार बनने वाला है, जिसके चलते इस दिन को लेकर फिर से चर्चा तेज हो गई है।
13 नंबर और शुक्रवार से जुड़ा डर
‘Friday the 13th’ के डर को समझने के लिए दो अलग-अलग अंधविश्वासों को जोड़कर देखा जाता है। पहला है Triskaidekaphobia, यानी 13 नंबर का डर। दूसरा है शुक्रवार के दिन को अशुभ मानना। जब ये दोनों एक साथ आते हैं तो इस डर को वैज्ञानिक भाषा में Paraskevidekatriaphobia कहा जाता है।
मान्यता है कि 12 संख्या पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है—जैसे साल के 12 महीने, 12 राशियाँ और 12 अपोस्टल्स (Apostles)। इसके विपरीत 13 संख्या को इस संतुलन को बिगाड़ने वाली संख्या माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं से भी जुड़ा है संबंध
धार्मिक दृष्टिकोण से भी शुक्रवार को लेकर कई मान्यताएँ हैं। माना जाता है कि ईसा मसीह को शुक्रवार के दिन ही सूली पर चढ़ाया गया था, जिससे इस दिन को नकारात्मक घटनाओं से जोड़ा जाने लगा। यही वजह है कि कई लोग शुक्रवार और 13 तारीख के मेल को अशुभ मानते हैं।
इतिहास और कहानियों का असर
इतिहास में भी कुछ घटनाओं को इस दिन से जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए 1307 में नाइट्स टेम्पलर की गिरफ्तारी को भी ‘Friday the 13th’ से जोड़ा जाता है। इसके अलावा बाइबिल की प्रसिद्ध घटना ‘लास्ट सपर’ (Last Supper) में भी 13 लोगों की मौजूदगी की कहानी इस अंधविश्वास को बढ़ाने में बताई जाती है।
फिल्मों और मनोरंजन जगत ने भी इस धारणा को मजबूत किया है। खासकर 1980 में आई हॉरर फिल्म ‘Friday the 13th’ और उसके बाद आए सीक्वल्स ने इस तारीख को एक डरावने दिन के रूप में लोकप्रिय बना दिया।
क्या सच में अशुभ होता है यह दिन?
हालांकि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मानते हैं कि ‘Friday the 13th’ सिर्फ एक अंधविश्वास है और इसका किसी वास्तविक घटना या दुर्भाग्य से कोई प्रमाणित संबंध नहीं है। फिर भी, सदियों पुरानी मान्यताओं और कहानियों के कारण आज भी कई लोग इस दिन को लेकर सतर्क रहते हैं।

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