चंडीगढ़, 8 अप्रैल : Punjab and Haryana High Court की ‘बस्तिवादी दौर की पुलिसिंग’ पर सख्त टिप्पणी के बाद पंजाब पुलिस ने अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने केवल अपुष्ट ‘गुप्त सूचना’ के आधार पर युवाओं के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज करने पर नाराजगी जताई थी। पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब साफ-सुथरे पृष्ठभूमि वाले युवाओं के खिलाफ कोई भी जबरदस्ती कार्रवाई केवल ठोस और निष्पक्ष सबूतों के आधार पर ही की जाएगी।
पहचान उजागर करने पर रोक
नए निर्देशों के अनुसार, आमतौर पर जांच के दौरान युवाओं की पहचान मीडिया में उजागर नहीं की जाएगी। साथ ही उनके शैक्षणिक संस्थानों और नियोक्ताओं को भी तब तक जानकारी नहीं दी जाएगी, जब तक यह कानूनी रूप से जरूरी न हो। पुलिस ने खास तौर पर 18 से 20 वर्ष के युवाओं को ध्यान में रखते हुए कहा है कि जांच के दौरान उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने लाने से बचाया जाएगा, ताकि उनके करियर और पढ़ाई पर असर न पड़े।
17 दिशा-निर्देशों वाला सर्कुलर जारी
3 अप्रैल को जारी इस सर्कुलर में फील्ड अधिकारियों के लिए 17 व्यापक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पहली बार संदेह के घेरे में आए युवाओं के लिए जांच प्रक्रिया खुद सजा न बन जाए। सर्कुलर में कहा गया है कि निजी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जब्ती केवल जरूरी डेटा तक सीमित रहेगी और उन्हें जल्द वापस किया जाएगा, ताकि पढ़ाई या पेशेवर गतिविधियों में बाधा न आए। निर्देशों में जांच अधिकारी (IO) को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जांच के दौरान छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और उनकी अकादमिक निरंतरता बनी रहे।
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