न्यूयार्क, 8 अप्रैल : न्यूयॉर्क की United States District Court for the Eastern District of New York ने भारतीय उद्योगपति Gautam Adani की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी नियामक द्वारा दायर धोखाधड़ी मामले को खारिज करने के लिए सुनवाई की मांग की थी। अदालत ने दोनों पक्षों को प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस तय करने के निर्देश दिए हैं।
अडानी और उनके भतीजे Sagar Adani की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि U.S. Securities and Exchange Commission (SEC) के इस मामले में अमेरिकी अदालत का अधिकार क्षेत्र लागू नहीं होता। वकीलों के अनुसार, यह केस कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है।
रिश्वतखोरी के आरोपों पर सबूत न होने का दावा
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि कथित रिश्वतखोरी की योजना को साबित करने के लिए कोई ठोस या विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि SEC जिन बयानों को भ्रामक बता रहा है, वे केवल सामान्य कॉर्पोरेट आशावाद (puffery) हैं, न कि निवेशकों के लिए कोई गारंटी। अडानी पक्ष ने यह भी कहा कि इस मामले में निवेशकों को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। सभी बॉन्ड मैच्योर हो चुके हैं और Adani Green Energy ने 2024 में मूलधन और ब्याज समय पर लौटा दिया था।
लेन-देन भारत में, अमेरिकी कानून लागू नहीं
वकीलों ने तर्क दिया कि कथित लेन-देन और घटनाएं पूरी तरह भारत में हुईं और इनमें कोई अमेरिकी कंपनी या निवेशक सीधे तौर पर शामिल नहीं था, इसलिए यह मामला अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों के दायरे से बाहर है। गौरतलब है कि SEC ने नवंबर 2024 में आरोप लगाया था कि अडानी समूह ने सोलर प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए 250 मिलियन डॉलर से अधिक की रिश्वत की योजना बनाई और फंड जुटाने के दौरान इस तथ्य को छिपाया।
हालांकि अडानी समूह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और 30 अप्रैल 2026 तक केस खारिज करने के लिए औपचारिक याचिका दायर करने की तैयारी कर ली है। अदालत द्वारा सुनवाई की अनुमति मिलने के बाद अब अडानी समूह को शुरुआती स्तर पर ही इस मामले को खत्म करवाने का अवसर मिल गया है।
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