चंडीगढ़, 9 अप्रैल : Punjab and Haryana High Court ने पंजाब सरकार द्वारा कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ता (डीए) देने में कथित भेदभाव पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि इस तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 30 जून तक सभी पात्र कर्मचारियों और पेंशनरों को डीए का लाभ जारी किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को तय की गई है।
केंद्र सरकार की नीति का हवाला
याचिका में बताया गया कि Government of India साल में दो बार 1 जनवरी और 1 जुलाई ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर डीए में संशोधन करती है। परंपरा के अनुसार, पंजाब सरकार भी अपने कर्मचारियों को केंद्र के बराबर डीए देती रही है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि 1 जनवरी 2023 से मिलने वाली पांचवीं किस्त का भुगतान 1 नवंबर 2024 को किया गया, लेकिन 1 जुलाई 2023 से देय अगली किस्त अब तक जारी नहीं की गई है।
भेदभाव का आरोप
अदालत को बताया गया कि राज्य में तैनात अखिल भारतीय सेवाओं आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों तथा न्यायिक अधिकारियों—को केंद्र सरकार के पैटर्न पर नियमित रूप से डीए मिल रहा है, जबकि अन्य कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। पंजाब सरकार ने दलील दी कि राज्य कैबिनेट केंद्र सरकार के बराबर दरों पर डीए लागू करने के लिए बाध्य नहीं है। डीए देना एक नीतिगत फैसला है, जो राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए लिया जाता है।
दोबारा सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश देते हुए कहा कि 30 जून तक डीए जारी करना होगा। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
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