नई दिल्ली, 10 अप्रैल : इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज Yashwant Varma ने आज राष्ट्रपति Droupadi Murmu को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह कदम उन्होंने एक साल से अधिक समय से चल रहे विवाद और संभावित संसदीय कार्रवाई के बीच उठाया है। जस्टिस वर्मा का यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब उनके खिलाफ संसद में हटाने की प्रक्रिया चलने की संभावना थी। इस्तीफा देकर उन्होंने संभावित महाभियोग जैसी कार्रवाई से खुद को बचा लिया है।
लोकसभा स्पीकर ने दी थी मंजूरी
Om Birla ने पहले जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके तहत Judges Inquiry Act 1968 के तहत तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था, जो उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच कर रही थी। जस्टिस वर्मा ने इस प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए Supreme Court of India का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और संसदीय कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दे दी।
नकदी बरामदगी से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला 14 मार्च 2025 को उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास से कथित तौर पर बिना हिसाब-किताब की नकदी मिलने के बाद शुरू हुआ था। इस घटना ने न्यायिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। 22 मार्च 2025 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश Sanjiv Khanna ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। जांच के बाद जस्टिस वर्मा का तबादला Allahabad High Court में कर दिया गया था।
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