नई दिल्ली, 24 अप्रैल : पश्चिमी एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक कदम उठाया गया है। अमेरिका की मध्यस्थता से इज़राइल और लेबनान के बीच चल रहे युद्धविराम को अगले तीन हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। यह निर्णय वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद लिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले की घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर की।
उन्होंने बताया कि ओवल ऑफिस में हुई बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। ट्रंप ने इसे “बहुत सार्थक बैठक” बताया और कहा कि अमेरिका क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
इज़राइल और लेबनान के प्रतिनिधियों की मौजूदगी
इस बैठक में इज़राइल के राजदूत येचिएल लीटर और लेबनान की राजदूत नादा मुआवद शामिल थे। दोनों पक्षों ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई, ताकि क्षेत्र में जारी हिंसा को रोका जा सके और शांति की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। हालांकि इस वार्ता में हिज़बुल्लाह का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं था। ईरान समर्थित इस संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह “कब्जे वाली ताकतों के खिलाफ प्रतिरोध का अधिकार” रखता है। इससे शांति प्रक्रिया को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।
अमेरिका की शांति योजना और क्षेत्रीय प्रयास
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य इस अस्थायी युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलना है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह जल्द ही इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन की मेज़बानी कर सकते हैं। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब एक दिन पहले इज़राइली हमलों में एक पत्रकार सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी। लगातार हो रही हिंसा ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
स्थानीय लोगों ने ली राहत की सांस
विशेषज्ञों के अनुसार, युद्धविराम का यह विस्तार सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोगों के लिए बड़ी राहत है। हालांकि, हिज़बुल्लाह की गतिविधियों और सुरक्षा स्थिति को लेकर अभी भी चिंता बनी हुई है।
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