वॉशिंगटन/इस्लामाबाद, 26 अप्रैल : ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। दो महीनों से जारी इस खतरनाक टकराव को खत्म करने की उम्मीदें उस समय धुंधली पड़ गईं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का इस्लामाबाद दौरा अचानक रद्द कर दिया।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची भी मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान से बिना किसी ठोस नतीजे के लौट आए हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि शांति वार्ता फिलहाल ठप पड़ चुकी है और किसी समझौते की संभावना बेहद कम हो गई है।
शर्तों पर अड़े दोनों देश
ईरानी कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका की “बड़ी और एकतरफा मांगों” के आगे नहीं झुकेगा। हालांकि अराकची ने अपने पाकिस्तान दौरे को “फलदायी” बताया, लेकिन अमेरिकी वार्ताकारों के पीछे हटने से यह साफ हो गया है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इस अड़ियल रवैये के चलते युद्धविराम की कोशिशें पूरी तरह रुक गई हैं।
इस टकराव ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला है, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका और प्रमुख तेल उत्पादक देश ईरान के आमने-सामने आने से वैश्विक बाजार में भी उथल-पुथल मच गई है। कच्चे तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह गतिरोध जल्द खत्म नहीं हुआ, तो वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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