चंडीगढ़, 27 जुलाई 2026: भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ (War on Drugs) अभियान में महिलाएं उम्मीद और बदलाव लाने वाली सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही हैं। परिवार की मां, पत्नी, बहन और अन्य महिला सदस्य अपने परिवार वालों को इलाज कराने और सामान्य ज़िंदगी में लौटने के लिए प्रेरित करके नशे के खिलाफ़ लड़ाई में सबसे आगे हैं।
जब कोई परिवार नशे की चपेट में आता है, तो सबसे ज़्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। आर्थिक और मानसिक तनाव से लेकर घरेलू हिंसा के बढ़ते ख़तरे तक, नशा परिवारों को अंदर से खोखला कर देता है।
लेकिन अब पंजाब में परिवार नशे को एक बीमारी के तौर पर स्वीकार कर रहे हैं, अपने सदस्यों को इलाज के लिए प्रेरित कर रहे हैं, ठीक होने की प्रक्रिया में उनका साथ दे रहे हैं और उन्हें दोबारा नशे की लत में पड़ने से बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
नशा छुड़ाने की इस प्रक्रिया में महिलाएं प्रेरणा देने वाली, देखभाल करने वाली और मार्गदर्शन करने वाली सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही हैं। इतना ही नहीं, वे अपने आस-पास के लोगों और रिश्तेदारों को भी नशा छुड़ाने का इलाज कराने के लिए प्रेरित कर रही हैं ताकि वे भी सम्मानजनक ज़िंदगी जी सकें।
जलालाबाद के S.F.C. कॉलेज में “नशे की समस्या – महिलाओं पर पड़ने वाला बोझ” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में भी ये अनुभव और प्रेरणादायक कहानियाँ सामने आईं। इस कार्यक्रम में, नशे की लत से उबर चुकी महिलाओं और उनके परिवारों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे उनके साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प ने उनके परिवार के सदस्यों को नशे की अंधेरी दुनिया से बाहर निकालकर सम्मानजनक ज़िंदगी में वापस लाया।
लुधियाना की रागिनी कौर ने कहा, “मेरे पति को शादी से पहले ही नशे की लत थी, लेकिन मुझे इसके बारे में तब पता चला जब हम साथ रहने लगे। हमने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी, तभी किसी ने हमें उन्हें नशा मुक्ति और डिटॉक्सिफिकेशन सेंटर ले जाने की सलाह दी। वहाँ का इलाज बहुत फ़ायदेमंद रहा। आज वे पूरी तरह से नशे से मुक्त हैं। पति के नशे से मुक्त होने के बाद, हमने अपने मामा के बेटे को भी इलाज के लिए उसी सेंटर में भेजा और वह भी सफलतापूर्वक नशे की लत से बाहर आ गया।”
मोगा के बुट्टर कलां गाँव की बलविंदर कौर ने भी अपने पति के नशे की लत से बाहर आने की कहानी साझा की। “नशे ने हमारे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था। काउंसलिंग के दौरान हमें समझाया गया कि नशा एक ऐसी समस्या है जिसमें पूरे परिवार की भूमिका होती है। मैं अपने पति को नशा मुक्ति केंद्र ले गई। आज वे पूरी तरह नशे से मुक्त हैं। इतना ही नहीं, हमारे पड़ोस का एक युवक, जो हेरोइन का आदी था, वह भी सफलतापूर्वक नशे की लत से बाहर आ गया है।”
ये भी देखें: युद्ध नशेआं विरुद्ध के तहत अब तक 5091 केस दर्ज, 7105 ड्रग तस्कर गिरफ्तार – कुलदीप धालीवाल

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