चंडीगढ़, 08 सितंबर 2026: डायबिटीज़ से पीड़ित व्यक्ति के लिए पैर पर लगी एक छोटी-सी चोट धीरे-धीरे गंभीर चिकित्सीय आपातस्थिति का रूप ले सकती है। नसों को नुकसान पहुँचने के कारण दर्द का एहसास कम हो सकता है, जिससे चोट का पता चलना मुश्किल हो जाता है। रक्त संचार ख़राब होने से घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है, जबकि संक्रमण गहरे ऊतकों(टिश्यूज) तक फैल सकता है और गंभीर मामलों में अंग तक ख़तरे में पड़ सकता है। पंजाब के सैकड़ों मरीज़ों के लिए, मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) उस समय सुरक्षा कवच बनी, जब डायबिटिक फुट की समस्या बढ़कर स्वस्थ होने के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई।
47 वर्षीय हरचरण सिंह एडवांस्ड डायबिटिक फुट रोग से जूझ रहे थे। नसों को नुकसान पहुँचने के कारण चोट का पता लगाने की उनकी क्षमता कम हो गई थी, जबकि संक्रमण गहरे ऊतकों(टिश्यूज) तक फैल चुका था। डॉक्टरों ने संक्रमित और मृत ऊतकों को हटाने तथा पैर को ठीक होने का अवसर देने के लिए सर्जिकल डिब्राइडमेंट किया।
38 वर्षीय राजा को भी इसी तरह के ख़तरे का सामना करना पड़ा। डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण उन्हें एक घाव का लगभग एहसास ही नहीं हुआ, जो बाद में गंभीर संक्रमण में बदल गया और संक्रमण के हड्डी तक पहुँचने का ख़तरा पैदा हो गया। ऐसे में समय पर सर्जरी आवश्यक हो गई।
एक अन्य लाभार्थी 57 वर्षीय वीना के मामले में ख़राब रक्त संचार के कारण घाव भरना मुश्किल हो गया था। उनका अल्सर इस स्थिति तक पहुँच गया कि पैर काटने की नौबत आने का ख़तरा पैदा हो गया। संक्रमित ऊतकों को हटाने के लिए सर्जरी करनी पड़ी।
ये भी देखें: मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मानसिक स्वास्थ्य का उपचार करवाने वाले 75% लाभार्थी 18–45 आयु वर्ग के

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