चंडीगढ़, 20 अक्टूबर 2026: आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि अयोध्या में श्री राम मंदिर के चंदा चोरी मामले के ज़िम्मेदार लोगों को कड़ी सज़ा दिलाएं।
उन्होंने कहा कि मंदिर से जुड़ी भावनाओं को उठाकर सत्ता में आई भाजपा को श्रद्धलुओं की आस्था के साथ धोखा करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शना चाहिए। चंदा चोरी की 105 घटनाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने सीनियर अधिकारियों की भूमिका की पूरी जांच की मांग की और सवाल किया कि जवाबदेही सिर्फ़ जूनियर कर्मचारियों तक ही क्यों होनी चाहिए। अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के एक लाख से ज़्यादा राम श्रद्धलुओं ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर न्याय और जवाबदेही की मांग की है और ऐलान किया है: “राम भक्तों की पुकार, चंदा चोरों को सज़ा इस बार ।”
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आप पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि लाखों राम भक्तों ने अपनी मेहनत की कमाई अयोध्या में श्री राम मंदिर बनाने के लिए पूरी श्रद्धा और भावना से दी है। अगर श्रद्धालुओं के दिए गए चंदे में कोई घोटाला हुआ है, तो यह उनकी आस्था के साथ बहुत बड़ा धोखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो भी दोषी पाया जाए, उसे सख्त से सख्त सज़ा मिले।
आप पंजाब प्रधान ने कहा कि वह यह मुद्दा पार्टी प्रधान के तौर पर नहीं, बल्कि एक राम भक्त के तौर पर उठा रहे हैं, जो पूरे पंजाब के लाखों लोगों का दर्द महसूस करते हैं। पूरे देश में लोगों ने श्री राम मंदिर बनने का जश्न बड़ी खुशी से मनाया और इस पवित्र प्रोजेक्ट के लिए अपनी बचत से दिल खोलकर योगदान दिया। उनकी आस्था और योगदान का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।
पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से मिले पत्रों के बंडल दिखाते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब के एक लाख से ज़्यादा राम श्रद्धलुओं ने अपनी मर्ज़ी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठियां लिखी हैं, जिसमें उनसे दखल देने और न्याय सुनिश्चित करने की अपील की गई है। ये चिट्ठियां राज्य के करीब 22,000 पोलिंग बूथों से आई हैं। हम इन्हें श्रद्धलुओं की मिली-जुली अपील के तौर पर प्रधानमंत्री को सौंपेंगे, जो जवाबदेही चाहते हैं और हर ज़िम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहते हैं।
उन्होंने सवाल किया कि जब बड़े अधिकारियों और मंदिर का प्रबंधन देखने वालों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठते हैं, तो जवाबदेही सिर्फ़ निचले लेवल के कर्मचारियों तक ही क्यों खत्म होनी चाहिए? अगर चोरी की घटनाएं बार-बार हुई हैं, तो संस्था की देखरेख करने वालों की ज़िम्मेदारी की भी जांच होनी चाहिए।
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