लखनऊ, 1 जून : केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) के वैज्ञानिकों ने जड़ी-बूटियों के आधार पर एक नई दवा का विकास किया है, जो रक्त कैंसर के खिलाफ 80 प्रतिशत प्रभावी होने का दावा करती है। इस दवा का परीक्षण चूहों पर सफलतापूर्वक किया गया है, और अब इसे मानव परीक्षण के लिए तैयार किया जा रहा है। सीमैप के अनुसार यह दवा मरीज को केवल 28 दिनों में ठीक करने की क्षमता रखती है और इसे आयुर्वेदिक पद्धति का उपयोग करके तैयार किया गया है।
दवा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वैज्ञानिक डॉ. अरविंद सिंह नेगी ने बताया कि इसके लैब परीक्षण के तीन चरण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। यह दवा कम खुराक में भी रक्त कैंसर को पूरी तरह से ठीक कर सकती है, जबकि मौजूदा दवाओं के लिए अधिक खुराक की आवश्यकता होती है, जिससे दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ जाता है। वर्तमान में, यह दवा गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस (जीएलपी) प्रयोगशाला से मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में है।
जड़ी बूटीयों के उपयोग से मिलेगा निदान
सीएमएपी के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि आयुर्वेदिक प्रणाली का उपयोग करके रक्त कैंसर की संभावित दवा विकसित की गई है। हमने हर परीक्षण वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बहुत सावधानी से किया है। यह दवा भारतीय परंपराओं और आधुनिक विज्ञान का संतुलित मिश्रण है। हम इसे यथाशीघ्र मानव उपयोग में लाने की दिशा में काम कर रहे हैं। वर्तमान में बाजार में उपलब्ध मुख्य रक्त कैंसर दवाओं में इमैटिनिब, डेसाटिनिब, निलोटिनिब, तथा साइक्लोफॉस्फेमाइड और फ्लूडरैबाइन जैसी कीमोथेरेपी दवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, सीएआर-टी सेल थेरेपी भी एक नई तकनीक है। हालाँकि, अब तक कोई प्रमाणित आयुर्वेदिक दवा उपलब्ध नहीं थी और यह पहली बार है कि किसी वैज्ञानिक संगठन ने ऐसा दावा किया है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि दवा विकास प्रक्रिया में अनुसंधान, प्रारंभिक परीक्षण, पशु परीक्षण, अनुमोदन, प्राधिकरण, मानव परीक्षण और अंतत: बाजार में प्रवेश शामिल है। सभी चरणों में सफलता मिलने के बाद ही दवा आम जनता के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।

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