चंडीगढ़, 2 जुलाई: मानसून सत्र में पेश होने वाले संभावित बिजली संशोधन एक्ट के खिलाफ पंजाब के किसान सड़कों पर उतरेंगे। गुरुवार को सभी जिलों में एक्सियन से लेकर बड़े बिजली अधिकारियों को बिजली संशोधन एक्ट 2025 के खिलाफ मांग पत्र सौंपे जाएंगे। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि इस मानसून सत्र में यह बिल लाने की योजना है, जिसके अनुसार बिजली क्षेत्र का काम निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। यह बिल 2020 से संसद में स्थायी समिति के पास लंबित है। उन्होंने कहा कि इस एक्ट के अनुसार बिजली कंपनियां खुद बिजली की दरें तय करेंगी।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में बिजली विनियामक आयोग बिजली दरें तय करता है। हर साल पावरकॉम की ओर से बिजली दरें तय करने के लिए आवेदन किया जाता है, जिस पर बिजली विनियामक आयोग आम घरेलू उपभोक्ताओं, किसान संगठनों, औद्योगिक संगठनों आदि चार अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से विचार-विमर्श करने के बाद नई दरें तय करता है, जो पूरे साल के लिए लागू होती हैं।
किसान संगठनों को चिंता है कि अगर यह बिल पास हो गया तो यह काम निजी कंपनियों के हाथों में चला जाएगा, जो पेट्रोल कंपनियों की तरह अपने दाम खुद तय करेंगी। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होगी। उन्होंने केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भविष्य में उपभोक्ताओं को पहले अपना फोन रिचार्ज कराना होगा, उसके बाद बिजली चलेगी। इस फोन की तरह ही रिचार्ज कराने के बाद बिजली चलेगी। यह सिर्फ किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी व्यापारियों और आम दुकानदारों के लिए भी अच्छा है। इसलिए इस बिल का विरोध करना जरूरी है।

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